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Fake Doctors Delhi : शादियों में बुकिंग कराकर BMW किराये पर चलाता था नीरज, सर्जरी करने वाली पूजा 10वीं पास

Sat, 18 Nov 2023 03:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

वह अपनी बीएमडब्ल्यू व अन्य कारों की शादियों में बुकिंग कराकर चलाता था। वह खुद ड्राइवर बनकर दूल्हा-दूल्हन के लिए किराये पर कार लेकर जाता था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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ग्रेटर कैलाश-एक में अग्रवाल मेडिकल सेंटर चलाकर लोगों को मौत के मुंह में पहुंचाने वाला डॉ. नीरज अग्रवाल छोटे से लेकर बड़ा सभी काम करता था। वह अपनी बीएमडब्ल्यू व अन्य कारों की शादियों में बुकिंग कराकर चलाता था। वह खुद ड्राइवर बनकर दूल्हा-दूल्हन के लिए किराये पर कार लेकर जाता था। जांच में पता लगा कि सर्जन व ऑपरेशन करने वाली पूजा 10वीं व महेंद्र 12वीं पास है। दोनों ही मरीजों को इंजेक्शन लगाते थे।

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ग्रेटर कैलाश-एक थाना पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों डाॅ. नीरज अग्रवाल (एमबीबीएस), उसकी पत्नी पूजा अग्रवाल (पहले घरेलू सहायिका), महेंद्र (लैब तकनीशियन) और डॉ. जसप्रीत एमबीबीएस (एमएस, सर्जन) को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर ले रखा है। दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक फोटो की वजह से डाॅ. अग्रवाल का पूरा साम्राज्य खत्म होने के कगार पर है। सेंटर में सबसे आखिर में मरीज असगर की मौत हुई थी। 

संगम विहार निवासी असगर का अग्रवाल मेडिकल सेंटर में गॉल ब्लेडर की पथरी का ऑपरेशन किया गया था। पथरी को निकालने के बाद पूजा ने असगर के बेटे को गॉल ब्लेडर व पथरी दिखाई थी। ये दोनों चीज दिखाते समय बेटे ने फोटो खींच ली थी। यही फोटो थी जिससे डाॅ. अग्रवाल के सारे राज खुल गए।
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हालात खराब होने पर असगर को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। अग्रवाल मेडिकल सेंटर से असगर की जो समरी सफदरजंग अस्पताल भेजी थी, उसमें समय कुछ और था और बेटे द्वारा खींची गई फोटो का समय कुछ और था। इस समय के अंतर में डाॅ. नीरज अग्रवाल फंस गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी की करतूतों से पर्दा उठा दिया।

अस्पताल के अंदर अपने एजेंट बिठा रखे थे
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी डाॅ. अग्रवाल ने सफदरजंग अस्पताल के जच्चा-बच्चा विभाग व ओपीडी और एम्स आदि की ओपीडी में अपने एजेंट बिठा रखे थे। जो भी मरीज यहां इलाज कराने आता, आरोपी के एजेंट कम पैसे में इलाज व सर्जरी करने का लालच देकर अग्रवाल मेडिकल सेंटर ले आते थे। सफदरजंग अस्पताल के जच्चा-बच्चा विभाग से कई मरीजों के सेंटर में लाने के पुलिस को सबूत मिले हैं।

दिल्ली मेडिकल काउंसिल से कुछ और शिकायतें मिलीं
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ग्रेटर कैलाश-एक थानाध्यक्ष अजीत सिंह को दिल्ली मेडिकल काउंसिल से कुछ और शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतें पर कानूनी सलाह ले ली गई है। बताया जा रहा है कानूनी सलाह में एफआईआर दर्ज करने की बात कही है। शनिवार तक रिपोर्ट मिलने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद और मामले दर्ज किए जाएंगे।

56 एटीएम कार्डों की पुलिस कर रही जांच
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी डाॅ. अग्रवाल के कब्जे से 56 एटीएम कार्ड मिले हैं। ऐसा कोई बैंक नहीं है जिसमें आरोपी का खाता न हो। ऐसे में पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी 56 एटीएम कार्ड का क्या करता था। पुलिस ने सभी बैंकों को नोटिस भेजा है। नोटिस भेजकर ये पता किया जा रहा है कि इसके बैंक खातों में कितना पैसा है और ये पैसा कहां से आया है।

अग्रवाल मेडिकल सेंटर को कारण बताओ नोटिस
दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-एक स्थित अग्रवाल मेडिकल सेंटर को नर्सिंग होम सेल ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में एक माह के अंदर सेंटर को जवाब देने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस नोटिस में सेंटर के पंजीकरण को रद्द करने और सेंटर को बंद करने के बारे में कहा है। 

नोटिस में दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण एक्ट 1953 के तहत तीन बिस्तर के लिए मान्य है। इसके खिलाफ ग्रेटर कैलाश पुलिस के तरफ से शिकायत मिली है। इसमें गंभीर आरोप लगे हैं। इस आरोपों की जानकारी देते हुए सेंटर को एक माह के अंदर जवाब देने को कहा गया है। इस नौ मरीजों के साथ हुए हादसों का भी जिक्र है। बता दें कि इससे पहले दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने भी नोटिस भेजा है। इसके अलावा दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी ने अग्रवाल मेडिकल सेंटर के खिलाफ मामला सामने आने के बाद पुलिस से सारी जांच रिपोर्ट मांगी गई है। इन रिपोर्ट का अध्ययन कर डॉ. अग्रवाल पर कार्रवाई की जाएगी। 

एक और डॉक्टर की भूमिका की जांच कर रही पुलिस
ग्रेटर कैलाश-एक के अग्रवाल मेडिकल सेंटर में मौत के खेल के मामले में पुलिस फरीदाबाद के एक अन्य डॉक्टर की संलिप्तता की जांच कर रही है।  पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान इस मामले में यह सामने आया कि क्लिनिक में कई सर्जरी के संचालन में फरीदाबाद के एक अन्य डॉक्टर का नाम भी इस्तेमाल किया गया था। 

पुलिस ने कहा कि यदि वह इस रैकेट में शामिल पाया गया तो फरीदाबाद के डॉक्टर पर भी मामला दर्ज कर सकते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं जो आरोपियों के संपर्क में थे। सर्जरी ज्यादातर पित्ताशय की पथरी को हटाने या सिजेरियन डिलीवरी के लिए होती थी। पुलिस ने कहा कि अग्रवाल के आवास और क्लिनिक पर तलाशी के दौरान 414 प्रिस्क्रिप्शन पर्चियां जब्त की हैं, जिनमें काफी जगह छोड़ने के बाद केवल डॉक्टरों के हस्ताक्षर थे। 

शीर्ष पर दो रजिस्टरों में उन रोगियों का विवरण है, जिनका क्लिनिक में चिकित्सीय गर्भपात (एमटीपी) किया गया था, और कई प्रतिबंधित दवाएं और इंजेक्शन थे। एक जांच से पता चला कि अग्रवाल मेडिकल सेंटर के मालिक नीरज के खिलाफ दिल्ली मेडिकल काउंसिल को 9 शिकायतें सौंपी गई थीं। पुलिस ने कहा कि सभी मामलों में मरीजों की मौत कथित लापरवाही के कारण हुई। आरोपियों को अक्तूबर में मिली असगर के बेटे की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था। 

पुलिस ने अग्रवाल मेडिकल सेंटर का लाइसेंस रद्द करने के लिए मेडिकल काउंसिल को भी लिखा है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि वे मामले में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट से संबंधित धाराएं भी जोड़ सकते हैं। 
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