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Delhi-NCR: इंदिरापुरम अग्निकांड ने बजाई खतरे की घंटी, घर ही नहीं पूरा सपना हो सकता है खाक; हाईराइज का भयानक सच

Sat, 02 May 2026 03:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

25 से 40 मंजिल की इमारतों का विस्तार लगातार हो रहा है लेकिन इन ऊंचाइयों के पीछे खामोश खतरा छिपा है। यह खतरा है आग का जो घर ही नहीं जलाएगा बल्कि पूरे टावर को मलबे में बदल सकता है।
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इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के फ्लैटों में लगी भीषण आग। फाइल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर की चमकती स्काईलाइन अब कंक्रीट के ऊंचे जंगल में बदल चुकी है। 25 से 40 मंजिल की इमारतों का विस्तार लगातार हो रहा है लेकिन इन ऊंचाइयों के पीछे खामोश खतरा छिपा है। यह खतरा है आग का जो घर ही नहीं जलाएगा बल्कि पूरे टावर को मलबे में बदल सकता है। ज्यादातर फ्लैट मालिकों के पास कंटेंट इंश्योरेंस है जो फर्नीचर और अंदरूनी सामान तक सीमित। ऐसे में नुकसान का पूरा बोझ फ्लैट मालिकों पर आ जाता है और आपके पास सरकारी मदद के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।

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मान लीजिए, रात के सन्नाटे में ग्राउंड या पहली मंजिल पर आग लगती है। शुरुआत में यह मामूली हादसा लगता है लेकिन देखते ही देखते तापमान 600 से 800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस स्तर पर कंक्रीट के भीतर का सरिया अपनी ताकत खोने लगता है और ढांचा यील्ड पॉइंट पर पहुंच जाता है। यानी वह सीमा जहां से इमारत अंदर ही अंदर टूटने लगती है। अगर आग ज्यादा देर तक भड़कती रही तो सबसे बड़ा खतरा नींव पर आता है।

एक बार आधार कमजोर हुआ, तो इमारत का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद इमारत को असुरक्षित घोषित कर गिराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। हाईराइज सोसायटी में रहने वाला व्यक्ति सिर्फ अपने फ्लैट का मालिक नहीं होता बल्कि पूरी जमीन और कॉमन एरिया में उसका हिस्सा होता है। यानी अगर बिल्डिंग गिरती है, तो सिर्फ घर नहीं पूरी संपत्ति दांव पर लग जाती है। खास बात यह है कि ज्यादातर फ्लैट मालिकों के पास केवल कंटेंट इंश्योरेंस होता है, जो फर्नीचर और अंदरूनी सामान तक सीमित है। पूरी बिल्डिंग के ढांचे का बीमा यानी मास्टर पॉलिसी अब भी ज्यादातर सोसायटियों में नदारद है।
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फ्लैट मालिकों को पास बचते हैं तीन रास्ते, लेकिन तीन है मुश्किलों से भरे...

  • अगर सोसायटी ने पूरी बिल्डिंग का मास्टर इंश्योरेंस कराया है, तो यह सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है। ऐसे में बीमा कंपनी स्ट्रक्चर के नुकसान का आकलन कर री-कंस्ट्रक्शन का खर्च उठाती है। हालांकि हकीकत यह है कि एनसीआर की बड़ी संख्या में सोसायटियों में यह पॉलिसी है ही नहीं।
  • अगर जांच में सामने आता है कि आग खराब निर्माण सामग्री, फायर सिस्टम की विफलता या मेंटेनेंस की लापरवाही के कारण लगी तो फ्लैट मालिक उपभोक्ता अदालत या अन्य संबंधित विभागों का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इससे मुआवजे और जिम्मेदारी तय होने की संभावना होगी हालांकि केस साल दर साल और कई बार तो दशकों तक चल सकता है।
  • तीसरा रास्ता इमारत गिर जाए तो भी जमीन का मालिकाना हक फ्लैट मालिकों के पास बना रहता है। इसे यूडीएस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सभी मालिक मिलकर जमीन बेच सकते हैं, या किसी नए डेवलपर के साथ समझौता कर दोबारा फ्लैट बनवा सकते है, लेकिन इस प्रक्रिया को करने में सभी मालिकों की सहमति लेना मुश्किल होता हैै।

अग्नि सुरक्षा को लेकर होती रही है लापरवाही...
जमीनी हकीकत और भी डरावनी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की कई सोसायटियों में फायर एनओसी है लेकिन फायर सिस्टम अक्सर बंद या अधूरे मिलते हैं। एक फ्लैट की लापरवाही पूरी इमारत के लिए चेन रिएक्शन बन सकती है। सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगता है जिनके फ्लैट पर लोन चल रहा है। इमारत भले खत्म हो जाए लेकिन बैंक की ईएमआई जारी रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब वक्त आ गया है कि हाईराइज इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल इंश्योरेंस अनिवार्य किया जाए। साथ ही, खरीदारों को फ्लैट खरीदते समय जांचना चाहिए कि उनकी सोसायटी में पूरी बिल्डिंग का बीमा है या नहीं। क्योंकि इन आसमान छूती इमारतों में सिर्फ ऊंचाई नहीं बढ़ रही खतरा भी उतनी ही तेजी से ऊपर चढ़ रहा है।

हाईराइज इमारतों में सिर्फ फायर सेफ्टी नहीं, बल्कि बीमा बेहद जरूरी है। हादसे के बाद सबसे बड़ी राहत वही देता है।
-परम यादव, प्रेसिडेंट, डीडीए इंजीनियर एसोसिएशन

इस पर ध्यान देना जरूरी...

  • पूरी बिल्डिंग (स्ट्रक्चर) का बीमा है या सिर्फ फ्लैट का।
  • फायर एनओसी सिर्फ कागज में नहीं, बल्कि उसकी वैधता भी जांचें।
  • इमारत में फायर सेफ्टी सिस्टम काम कर रहे हैं या नहीं स्प्रिंकलर
  • फायर अलार्म, हाइड्रेंट सिर्फ लगे होना काफी नहीं, चालू होना जरूरी है।
  • इमारत का हालिया स्ट्रक्चरल ऑडिट कब हुआ था,
  • 5–10 साल पुरानी इमारतों में नियमित ऑडिट जरूरी होता है।
  • आरडब्ल्यूए की फाइनेंशियल स्थिति और फंड, मेंटेनेंस फंड, रिजर्व फंड और खर्च की पारदर्शिता देखें।
  • इमारत के बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड और निर्माण गुणवत्ता जरूर जांचें।
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