आर्थिक अपराध शाखा ने अरब देशों में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी कॉल सेंटर चलाकर सोशल मीडिया के जरिए विदेश में प्लेसमेंट के लिए वीजा देने का झांसा देते थे और पीड़ितों से 80 से 90 हजार रुपये लेने के बाद अपना कॉल सेंटर बंद कर देते थे। बाद में दूसरी जगह पर सेंटर खोल लेते थे। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 363 पासपोर्ट, 59 वीजा, 2.55 लाख रुपये, कई देशों के नकली स्टांप, दो कंप्यूटर, एक लैपटॉप, चार चेक बुक, पिस्टल और 5 कारतूस बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपियों ने अब तक 80 लोगों से ठगी कर चुके हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या ज्यादा भी हो सकती है। ठगी के शिकार ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राम अनमोल ठाकुर, अरशद, गुलबहार अली और श्रुति के रूप में हुई है। सभी आरोपी किलोकरी, आश्रम इलाके में रहते थे। उन्होंने बताया कि इस साल 15 दिसंबर को धर्मेंद्र कुमार ने आर्थिक अपराध शाखा में ठगी की शिकायत की। उसने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फिजा प्लेसमेंट एजेंसी का एक विज्ञापन देखा। इसमें खाड़ी देशों और मध्य एशिया के वीजा के लिए प्लेसमेंट और रहने की व्यवस्था का आश्वासन दिया गया।
कंपनी ने शिकायतकर्ता से 90 हजार रुपये लेने के बाद जाली वीजा कॉपी और दुबई का हवाई टिकट जारी कर दिया, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया। शिकायतकर्ता जब जनकपुरी स्थित प्लेसमेंट एजेंसी के कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि आरोपी कार्यालय खाली कर भाग चुके हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपी सिंडिकेट तरीके से जाली वीजा और प्लेसमेंट का धंधा चला रहे हैं। वह विदेशों में नौकरी के इच्छुक लोगों से ठगी कर रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों के फोन नंबरों की तकनीकी निगरानी कर 16 दिसंबर को चारों आरोपियों को किलोकरी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उपायुक्त जितेंद्र मीणा ने बताया कि आरोपियों के पास से 363 पासपोर्ट मिले हैं, जिससे आशंका है कि आरोपियों ने सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुके हैं। अब तक शाखा में 80 लोगों ने शाखा में शिकायत दी है।
आठ देशों के फर्जी स्टांप से ठगी
आरोपियों ने जॉर्डन, ओमान, इराक, कतर, आर्मेनिया, न्यूजीलैंड, रूस, इंग्लैंड का फर्जी स्टाम्प बना रखा था। इसके जरिए वे जाली वीजा तैयार करते थे। लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए उन लोगों ने जनकपुरी में फर्जी कॉल सेंटर खोल रखा था। वहां पर ठगी करने के बाद वह कनॉट प्लेस में कॉल सेंटर खोलकर ठगी कर रहे थे। जांच के बाद पुलिस ने बताया कि आरोपी डेढ़ साल से ठगी कर रहे थे। अरशद कुवैत में रह चुका है।