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Delhi Excise Policy: मनीष सिसोदिया को बड़ा झटका, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जमानत देने से HC ने किया इनकार

Mon, 03 Jul 2023 02:45 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि सिसोदिया को जमानत देने से इनकार करने वाला विशेष न्यायाधीश का आदेश तर्कसंगत है और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर पारित किया गया था। उन्होंने कहा इस अदालत को विशेष न्यायाधीश के आदेश में कोई खामी या अवैधता नहीं मिली।
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मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पिछली शराब नीति के कार्यान्वयन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया। वन्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने सह-आरोपी हैदराबाद के व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली, आप के संचार प्रभारी विजय नायर और परनोड रिकार्ड इंडिया के महाप्रबंधक बेनॉय बाबू को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

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अदालत ने कहा कि सिसोदिया को जमानत देने से इनकार करने वाला विशेष न्यायाधीश का आदेश तर्कसंगत है और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर पारित किया गया था। उन्होंने कहा इस अदालत को विशेष न्यायाधीश के आदेश में कोई खामी या अवैधता नहीं मिली। इसके अलावा, न्यायमूर्ति शर्मा ने यह भी कहा कि अदालत ने सीबीआई मामले में सिसोदिया को जमानत देने से भी इनकार कर दिया था।

अदालत ने पिछले महीने अपनी पत्नी की खराब स्वास्थ्य स्थिति के मद्देनजर छह सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत की मांग करने वाली सिसोदिया की अर्जी भी खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा था कि सिसोदिया के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और उनके द्वारा संभाले गए पदों को नहीं भुलाया जा सकता। आप नेता को 26 फरवरी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का मामला है कि वर्ष 2021-22 के लिए उत्पाद शुल्क नीति के निर्धारण और कार्यान्वयन में अनियमितताएं थीं।
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सीबीआई ने आरोप लगाया कि सिसोदिया को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने गोल-मोल जवाब दिया और सबूत मिलने के बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया। सीबीआई की एफआईआर में कहा गया है कि सिसोदिया और अन्य ने निविदा के बाद लाइसेंसधारी को अनुचित लाभ पहुंचाने के इरादे से सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 के संबंध में "सिफारिश करने और निर्णय लेने" में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

दूसरी ओर ईडी का आरोप है कि कुछ निजी कंपनियों को थोक कारोबार में 12 फीसदी का मुनाफा देने की साजिश के तहत उत्पाद शुल्क नीति लागू की गई। इसमें कहा गया है कि मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठकों के मिनटों में ऐसी किसी शर्त का उल्लेख नहीं किया गया था। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ मार्जिन देने के लिए विजय नायर और साउथ ग्रुप के साथ अन्य व्यक्तियों द्वारा एक साजिश रची गई थी। एजेंसी के मुताबिक नायर दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की ओर से कार्य कर रहे थे।

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