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Delhi: विकिपीडिया खुद के विश्वकोश होने का दावा कैसे कर सकता है, दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 05 Nov 2024 07:47 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विकिपीडिया मानहानिकारक संपादनों का बचाव करने का हकदार नहीं हो सकता है, क्योंकि वह केवल एक मध्यस्थ होने का दावा करता है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने विकिपीडिया को खुद को विश्वकोश होने का दावा करने और एशियन न्यूज इंटरनेशनल (एएनआई) की एएनआई के बारे में विकी पेज पर किए गए मानहानिकारक संपादनों को हटाने की मांग के रास्ते में आने के लिए फटकार लगाई।

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जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विकिपीडिया मानहानिकारक संपादनों का बचाव करने का हकदार नहीं हो सकता है, क्योंकि वह केवल एक मध्यस्थ होने का दावा करता है। यदि आप मध्यस्थ हैं, तो आपको क्यों परेशानी हो रही है? यदि किसी और ने संपादन किया है और वह बिना किसी आधार के है, तो वह नीचे आ जाता है। उन्होंने कहा यदि आप एक दीवार मात्र हैं और किसी और ने वे बातें लिखी हैं और वे न्यायालय में आने के लिए तैयार नहीं हैं, तो मैं आपकी बात क्यों सुनूं। 

आगे कहा कि मैं सिर्फ यह देखूंगा कि आपके विश्वकोश में दी गई राय सही तस्वीर को चित्रित नहीं करती है, क्योंकि यह लेख का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता है, इसलिए पृष्ठ नीचे आ जाता है। हालांकि विकिपीडिया ने स्पष्ट किया कि वह एएनआई के बारे में विकिपीडिया के पृष्ठ पर किए गए कथनों या संपादनों का बचाव नहीं कर रहा है, लेकिन उसने इस मामले में अदालत की सहायता करने की मांग की, विशेष रूप से मंच की वास्तुकला के संबंध में।
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एएनआई ने विकिपीडिया पर मानहानि का मुकदमा किया है। समाचार एजेंसी के अनुसार, विकिपीडिया ने अपने पेज पर अपमानजनक संपादन की अनुमति दी, जिसमें पहले एएनआई को वर्तमान सरकार के लिए प्रचार उपकरण के रूप में संदर्भित किया गया था। अदालत ने कहा कि यह परेशान करने वाला है कि विकिपीडिया खुद को एक विश्वकोश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि वह दावा करता है कि वह मंच पर लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।

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