दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पॉक्सो मामले में प्रेमोदय खाखा और उनकी पत्नी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उनकी पिछली जमानत अर्जी भी ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
दिल्ली सरकार के पूर्व उपनिदेशक प्रेमोदय खाखा और उनकी पत्नी ने इस आधार पर उच्च न्यायालय में अपील दायर की कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पूरी चार्जशीट दायर नहीं की है। उन्होंने कहा, इसलिए वे डिफॉल्ट जमानत के हकदार हैं। दिल्ली के महिला एवं बाल विभाग में कार्यरत आरोपी अधिकारी और उसकी पत्नी ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167(2) के तहत जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में आरोपपत्र समय पर दायर किया गया था और कानून के अनुसार संज्ञान भी लिया गया है। न्यायमूर्ति सिंह ने आगे कहा कि जब खाखा को अस्पताल ले जाया गया तो वह जांच अधिकारियों को चिकित्सा साक्ष्य उपलब्ध कराने में विफल रहे और मामले में दो सह-अभियुक्त अभी भी फरार हैं। उन्होंने खाखास की याचिका को खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
खाखा दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग में सहायक निदेशक के पद पर तैनात थे। उन्हें 21 अगस्त, 2023 को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसके तुरंत बाद नौकरी से निलंबित कर दिया गया। उसकी पत्नी सीमा रानी को भी पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने में खाखा की सहायता करने और उकसाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
रिपोर्टों के अनुसार दुष्कर्म कथित तौर पर नवंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच हुआ जब लड़की अपने पिता की मृत्यु के बाद खाखा और उसकी पत्नी के साथ रह रही थी।
दुष्कर्म का खुलासा तब हुआ जब लड़की ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस अस्पताल में एक चिकित्सक को आपबीती सुनाई, जहां वह पैनिक अटैक का इलाज करा रही थी। वह खाखा को मामा कहती थी।बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया और पीड़िता की पहचान की रक्षा के संबंध में चिंता व्यक्त की।