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Delhi High Court: लोग सिर्फ राजनीतिक दलों के नाम पर वोट नहीं देते...उनकी नीति भी देखते हैं, याचिका पर आपत्ति

Fri, 15 Dec 2023 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा लोग सिर्फ राजनीतिक दलों के नाम पर वोट नहीं करते बल्कि उनकी नीतियों को भी देखते हैं।
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Delhi high court - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जाति, धार्मिक, जातीय और भाषाई अर्थ वाले राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने के लिए दायर जनहित याचिका आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा लोग सिर्फ राजनीतिक दलों के नाम पर वोट नहीं करते बल्कि उनकी नीतियों को भी देखते हैं।

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कार्यवाहक प्रमुख मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने कहा कि ये मुद्दे नीतिगत क्षेत्र में हैं और संसद ऐसे मामलों के लिए उचित मंच है। पीठ ने जोर देकर कहा कि अदालत इसमें प्रवेश नहीं कर सकती और कानून नहीं बना सकती।

पीठ ने याची से कहा आप केवल इन पार्टियों के नामों के बारे में बात कर रहे हैं। नाम निर्णायक नहीं है। आपको राजनीतिक दलों की नीतियों को देखना होगा। आपको यह देखना होगा कि वे कैसे काम कर रहे हैं। लेकिन इन सभी मुद्दों पर ध्यान देना होगा संसद। यह उनका क्षेत्र है। वे कानून बनाते हैं।
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उपाध्याय ने वर्ष 2019 में दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर धार्मिक, जातीय, जातीय या भाषाई अर्थ वाले राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने की मांग की थी। कानून मंत्रालय ने आज कोर्ट को बताया कि इस मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

भारत के चुनाव आयोग ने कहा कि उसने 2005 में एक नीतिगत निर्णय लिया था कि धार्मिक या जातिगत नाम वाली किसी भी पार्टी को अनुमति नहीं दी जाएगी। हालाँकि 2005 से पहले बनी पार्टियाँ काम करना जारी रख सकती हैं।

याची अश्विनी उपाध्याय ने अदालत से कहा कि राजनीतिक दल या उम्मीदवार जाति या धर्म के नाम पर वोट नहीं मांग सकते हैं, लेकिन वे ऐसी पार्टियां बना सकते हैं जो किसी विशेष जाति या धर्म को दर्शाती हैं और इसलिए कानून में स्पष्ट अंतर है।

उन्होंने तर्क दिया कि जाति/धर्म के नाम का उपयोग करने वाले राजनीतिक दल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हैं और इसलिए संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करते हैं। कोर्ट ने कहा अगर हम यह तय करते हैं, तो हम नीति क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, संसद इस पर फैसला करेगी। यह उनका क्षेत्र है।
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इसके बाद उपाध्याय ने अदालत से तारीख तय करने और मामले की अंतिम सुनवाई करने का अनुरोध किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 7 मई तय कर दी।

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