दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन के चेहरे का इस्तेमाल कर बनाए गए अश्लील और आपत्तिजनक डीपफेक वीडियो को तत्काल प्रभाव से सभी प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आदेश दिया है। जस्टिस जसमीत सिंह की एकल पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे कंटेंट से न केवल व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचती है, बल्कि यह साइबर अपराध की गंभीर श्रेणी में आता है।
अजय देवगन ने स्वयं याचिका दायर कर बताया था कि सोशल मीडिया पर उनके चेहरे को डीपफेक तकनीक से पोर्नोग्राफिक वीडियो में जोड़ा जा रहा है। इन वीडियो में उनका चेहरा अश्लील दृश्यों पर सुपरइम्पोज किया गया है, जिससे उनकी छवि को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
अजय देवगन के वकील सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि पिछले कुछ महीनों में उनके मुवक्किल के खिलाफ सैकड़ों ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें उनका चेहरा बिना सहमति के अश्लील कंटेंट में इस्तेमाल किया गया।
मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी, जिसमें सभी सोशल मीडिया कंपनियां अपना अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) पेश करेंगी।
अदालत ने जारी किए यह निर्देश
- सभी ज्ञात और अज्ञात प्लेटफॉर्म्स से ऐसे सभी डीपफेक वीडियो 24 घंटे के अंदर हटाए जाएं
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के साइबर सेल को ऐसे कंटेंट बनाने व फैलाने वालों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई करें
- गूगल, मेटा, एक्स कॉर्प और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश
- कोर्ट ने कहा, डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किसी की निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा पर हमला है। यह केवल सिविल नहीं, आपराधिक मामला भी है