उच्च न्यायालय ने ऐप आधारित कैब एग्रीगेटर्स को विकलांग लोगों के लिए अनुकूल और सुलभ बनाने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने रैपिडो को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर 2024 को होगी।
अदालत विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता अमर जैन और दृष्टिबाधित बैंकर दिप्तो घोष चौधरी द्वारा वकील राहुल बजाज और महूर गनी के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता रैपिडो मोबाइल राइड एप्लिकेशन पर भरोसा करते हैं लेकिन ऐप विकलांग व्यक्तियों की पहुंच आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहता है।
कोर्ट को बताया गया कि कठिनाई केवल रैपिडो ऐप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कैब एग्रीगेटर्स के पास भी विकलांग व्यक्तियों को समायोजित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया कि जब घोष को अपनी विकलांगता के बारे में पता चला तो रैपिडो कैप्टन (ड्राइवर) ने उसे सवारी देने से मना कर दिया और इस तरह के अनुभव विकलांग व्यक्ति की गरिमा को कमजोर करते हैं।
याचिका के अनुसार यह मुद्दा विकलांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम के उल्लंघन है। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 के अनुसार, सभी सेवा प्रदाता, सार्वजनिक और निजी, दोनों कानूनी रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म विकलांग व्यक्तियों के लिए पूरी तरह से सुलभ हैं। यह मामला यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की विफलता को भी प्रकाश में लाता है कि सभी कैब एग्रीगेटर्स विकलांग व्यक्तियों के लिए अपनी पेशकशों की कार्यात्मक और डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 7 उपयुक्त जनादेश लागू कर सकें।
याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि यह आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 41(1)(बी) का सीधा उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि सरकार परिवहन के सभी साधनों तक पहुंच प्रदान करने के लिए उचित उपाय करेगी। याचिका में अपने ऐप को विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाने में विफलता के लिए रैपिडो पर जुर्माना लगाने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।