- अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल प्रैक्टिसिंग वकील होने से कोई मामला असाधारण नहीं बन जाता
- सार्वजनिक रूप से बर्बरता करने वाले व्यक्ति को सम्मान नहीं दिया जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल प्रैक्टिसिंग वकील होने से कोई मामला असाधारण नहीं बन जाता। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने विकास यादव बनाम राज्य मामले में यह आदेश पारित किया। आवेदक विकास यादव को पहले से ही घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित किया जा चुका है। मामला 2 जनवरी 2026 का है। शिकायतकर्ता के अनुसार बेसमेंट जिम को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि आवेदक, उसके पिता और अन्य लोगों ने शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों पर हमला किया। जिम रॉड से मारपीट की गई, दो पुरुष सदस्यों के कपड़े जबरन उतारे गए और सीसीटीवी डीवीआर हटाकर सबूत नष्ट करने का प्रयास किया गया। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज को हैरान करने वाली बर्बर घटना कहा। पुलिस ने कई छापेमारी के बावजूद गैर-जमानती वारंट निष्पादित नहीं कर पाई। इसके बाद धारा 84 बीएनएसएस के तहत कार्यवाही हुई और 12 अक्टूबर 2026 को आवेदक को घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया। आवेदक ने इस आदेश को चुनौती भी नहीं दी।