अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने मंगलवार को कहा कि विवादों का सौहार्दपूर्ण निपटारा सभ्यता की पहचान है। उन्होंने प्राचीन भारत में भी मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रथा मौजूद होने की बात कही। दिल्ली हाईकोर्ट मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र 'समाधान' के 2026 के कैलेंडर के शुभारंभ पर कहा कि मध्यस्थता मुकदमेबाजी की तुलना में तेज, सस्ती और लचीली है। उन्होंने बताया कि देश अब एक मजबूत और संहिताबद्ध व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां अदालत के बाहर विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, विवादों का सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटारा सभ्यता का प्रतीक है। प्राचीन भारत में मध्यस्थता प्रणाली किसी न किसी रूप में प्रचलित थी। यह परंपरा हमारे गांवों में जारी रही है और आदिवासी क्षेत्रों में रिवाज के रूप में संरक्षित है। समाधान केंद्र दिल्ली हाई कोर्ट के अंतर्गत काम करता है और यह विवादों के वैकल्पिक निपटारे (एडीआर) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने इस केंद्र की सराहना की और कहा कि मध्यस्थता से न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि संबंधों को भी बनाए रखा जा सकता है।