एमसीडी बजट में शामिल कई मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाने से सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र में हंगामे के आसार हैं। निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव होने के बाद अब तक सदन की कोई भी बैठक शांतिपूर्वक संपन्न नहीं हुई है। हर बैठक में पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया है।
सत्र से पहले नेता विपक्ष राजा इकबाल सिंह के अनुसार, पहली बार ऐसा हो रहा है कि सदन में नेता विपक्ष को आयुक्त की ओर से प्रस्तुत किए गए बजट पर चर्चा करनी पड़ी है। इससे पहले स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन द्वारा सदन में बजट पेश किया जाता था, जिस पर नेता विपक्ष सदन में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते थे। उन्होंने 30 जनवरी को बजट अनुमान पर अपना पक्ष रखा था।
नेता विपक्ष ने अभी तक स्टैंडिंग कमेटी का गठन नहीं होना मेयर की तानाशाही है। अभी तक स्टैंडिंग कमेटी, स्पेशल कमेटी, तदर्थ कमेटी और अन्य कोई भी कमेटी गठित नहीं हुई है। इसलिए स्पष्ट रूप से मेयर ने आयुक्त द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुमान को ही बजट मान लिया है।
दूसरी तरफ मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने कहा है कि करीब एक महीने तक दिल्ली के विभिन्न इलाकों के आरडब्ल्यूए और बाजार समितियों के बीच पार्षदों के साथ बजट पर चर्चा की गई है। इसके बाद सोमवार से बुधवार तक हर दिन दोपहर दो बजे से निगम के सदस्य बजट पर पक्ष रखेंगे। इनको शामिल करने के बाद बृहस्पतिवार को नेता सदन मुकेश गोयल आखिरी बजट भाषण प्रस्तुत करेंगे।