उनकी दुकानों को भी अब सील कर दिया गया है। ना सिर्फ दुकानदार बल्कि 32 जोन के वेंडरों के भी लाइसेंस का नवीकरण नहीं हुआ है। इसमे कई वेंडर ऐसे भी हैं, जिनपर भ्रष्टाचार का आरोप भी है।
आधी-अधूरी शराब की दुकानें ही खुलीं
मौजूदा आबकारी नीति को वापस लेने के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव से इस बाजार में अफरातफरी मची थी। निजी शराब बिक्रेताओं को यह लगने लगा है कि एक महीने तक लाइसेंस को बढ़ाने का कोई मायने नहीं है। उन्हें इस बात का भी डर सताने लगा है कि कही जांच की आंच उन तक नहीं पहुंच जाए। लिहाजा वह शराब की बिक्री करने से भी कतराने लगे हैं। इस वजह से दिल्ली में 300 से अधिक दुकानें ही खुली। इतना ही नहीं, शराब की दुकानों पर माल का भी टोटा रहा। लोगों को मनपसंद ब्रांड से समझौता करने की मजबूरी रही।
जब तक पुरानी नीति लागू नहीं होती, रहेगा शराब का टोटा
दिल्ली शराब की किल्लत फिलहाल कम होती दिखाई नहीं पड़ रही है। मौजूद आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच की भी सिफारिश हुई है। ऐसे में निजी दुकानदार भी इससे दूरी बना रहे तो वेंडर भी शराब की सप्लाई करने से कतरा रहे है। राजनीतिक दबाव भी कम नहीं है। इस स्थिति में शराब के शौकीनों को आने वाले समय में किल्लत से दो-चार होना पड़ सकता है।
जानकारों का कहना है कि 31 अगस्त के बाद भी स्थिति तुरंत सुधरने वाली नहीं है। क्योंकि पुरानी नीति लागू होने के बाद भी कुछ दिनों के लिए अफरा-तफरी की स्थिति रहेगी। इसके छह महीने बाद एक और नई आबकारी नीति बननी है। लिहाजा परेशानी बनी रहने की उम्मीद है। राजस्व में भी कमी आएगी।
कालाबाजारी भी बढ़ने की आशंका
दिल्ली में अगर शराब की किल्लत हुई तो कालाबाजारी भी बढ़ने के कयास लगाए जा रहे है। पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता बढ़ेगी। शराब का स्टॉक भी होना शुरू होगा। एक बोतल पर एक छूट मिलने पर भी पहरा लग सकता है और फिर एमआरपी पर शराब की बिक्री शुरू हो जाएगी। उधर, रेस्तरां, पब और क्लब में भी शराब की सप्लाई कम होने की उम्मीद है।