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Delhi : दिल्ली का इको-सिस्टम भारी दबाव में, जैव विविधता पार्कों से सुधार संभव; नजदीकी इलाकों में हवा बेहतर

Wed, 31 Jul 2024 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार/आशीष सिंह, नई दिल्ली

सार

इको सिस्टम को दोबारा बेहतर करने की रोशनी दिल्ली के 921 हेक्टेयर में फैले सात जैव विविधता पार्कों से मिल सकती है।
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जैवविविधता (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दिल्ली के पारिस्थितिक तंत्र (इको-सिस्टम) पर इस वक्त भारी दबाव है, तभी बारिश होते ही राजधानी दरिया बन जाती है। बीते माह जल संकट से लोग परेशान थे। सर्दियां शुरू होते ही प्रदूषण की मार भी पड़ेगी। ऐसा हर साल होता है। वहीं, अंधाधुंध दोहन से अरावली पर्वत शृंखला और यमुना बीमार है, जबकि पूरब में बहने वाली यमुना और ठीक सामने उत्तरी से दक्षिणी कोने तक फैली अरावली पर्वत शृंखला ने शहर को पूरी तरह सुरक्षा मुहैया कराई थी, लेकिन अब इको-सिस्टम बेदम हो गया है।

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इको सिस्टम को दोबारा बेहतर करने की रोशनी दिल्ली के 921 हेक्टेयर में फैले सात जैव विविधता पार्कों से मिल सकती है। इनमें पेड़-पौधों, घास के मैदानों, नम भूमियों और जीव-जंतुओं की विविधता है। यह एक तरह से शहर की किडनी साबित हुए हैं। जैव विविधता पार्क खूबसूरती तो बढ़ा ही रहे हैं, अपने इलाके में हवा और पानी की भी गुणवत्ता बेहतर की है। पार्क के आसपास रहने वाले लोग इसे स्वीकार भी करते हैं। वे स्वच्छ सांस ले पा रहे हैं। ऐसे में पूरे दिल्ली के इको-सिस्टम को और बेहतर करने के लिए और जैव विविधता पार्क विकसित करने जरूरी हैं।

जीव-जंतुओं की 2500 प्रजातियां
सबसे पुराने यमुना जैव विविधता पार्क में तीन लेयर में ऊंचे पेडों, झाड़ियां व घास के मैदान हैं। वैज्ञानिक भाषा में यह विकसित वन हैं, जबकि साल 2000 में यह बंजर भूमि हुआ करती थी। सातों पार्कों में जीव-जंतुओं की 2,500 प्रजातियां भी हैं। इनमें सैकड़ों दुर्लभ और लुप्त प्राय प्रजातियां भी हैं।
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पार्क के नजदीक हवा की गुणवत्ता बेहतर
यमुना जैव विविधता पार्क के नजदीक गोपालपुर गांव है। यहां रहने वाली लीशा सिंह बताती हैं कि यहां की हवा दूसरे इलाकों के मुकाबले अच्छी है। सर्दी के दिनों में जब दूसरे इलाकों का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर रहता है, तो हम 100-150 की एक्यूआई में सांस लेते हैं। घर पहुंचकर काफी सुकून मिलता है। वहीं, वसंत विहार के नजदीक अरावली जैव विविधता पार्क है।90 वर्षीय विजय प्रकाश मित्तल बताते हैं कि पार्क ने आसपास की हवा साफ है।

शायद पार्क के नजदीक होने से ही लंबी उम्र तक जी पा रहे हैं। जगतपुर के वरुण कुमार का मानना है कि पहले यहां 130-150 फीट नीचे पानी मिलता था। अब भूजल स्तर 40-50 फीट के बीच है। साथ में गुणवत्ता भी ठीक हुई है। कमला नेहरू रिज के पास जवाहर नगर निवासी प्रदीप बहल ने बताया कि जहां से अरावली शृंखला शुरू होती है, वहां से यह हमारे लिए लाइफ लाइन है। हमारे यहां एक्यूआई दूसरे इलाकों से बेहतर रहता है।

डीडीए बायोडायवर्सिटी पार्क एक ऐसा नीला हरित बुनियादी ढांचा है जो न केवल प्रकृति का संरक्षण कर रहा है, बल्कि पेयजल संवर्धन और प्रदूषण का समाधान भी प्रदान कर रहा है। 
- डॉ. फैयाज खुदसर, इंचार्ज, जैव विविधता पार्क

पैसे में भी आंकी गई कीमत
अरावली जैव विविधता पार्क का विस्तार 692 एकड़ में है। पार्क के वैज्ञानिकों व डीयू के बिजनेस इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के शोधार्थियों की बीते साल की एक स्टडी में पता चला है कि पार्क से मिलने वाली सेवाओं की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बैठती है। अध्ययन में 15-18 साल पुराने वृक्षों को शामिल किया गया। इस उम्र के करीब 2.02 लाख पेड़ हर साल करीब 1,253.07 टन कार्बन सोख लेते हैं। इसकी कीमत 1.69 करोड़ रुपये है।

वहीं, पहले से इनमें करीब 9,107.90 टन कार्बन जमा है। इसकी कीमत 12.35 करोड़ रुपये है। यही नहीं इनसे सालाना 14.627 टन दूसरे प्रदूषक भी हट जाते हैं। इसकी कीमत 1.84 करोड़ रुपये है। इनसे हर साल करीब 1,10,977 घन फीट भूजल भी रिचार्ज होता है। इसकी कीमत करीब 5.89 लाख रुपये बैठती है। इस लिहाज से अरावली के पेड़ 15 करोड़ रुपये बचा रहे हैं। 

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