रक्षाबंधन से पहले एक बहन ने लीवर तो मां ने अपनी किडनी देकर अपने जिगर के टुकड़े की जान बचाई है। सिर्फ 22 साल की उम्र में ही मरीज को दोहरे प्रत्यारोपण से गुजरना पड़ा। मूल रूप से उत्तराखंड निवासी शख्स अब बिल्कुल ठीक है और सामान्य जीवन शैली में लौट रहा है।
नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, मरीज एक ऐसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से ग्रस्त था, जिसमें उसके लीवर में एंजाइम नहीं बनते थे और किडनी सहित दूसरे अंगों पर इसका बुरा असर पड़ रहा था। मरीज सात वर्ष की उम्र से ही प्राथमिक हाइपरॉक्सिल्यूरिया टाइप 1 नामक एक आनुवंशिक परेशानी से जूझ रहा था। यह एक जीन दोष है, जिसमें जीन में एक उत्परिवर्तन एंजाइमों का बनना कम होने लगता है और लीवर की क्षमता प्रभावित होती है। इससे किडनी और अन्य अंगों जैसे हृदय, हड्डियों, रक्त वाहिकाओं आदि में अघुलनशील कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल जमा होने लगता है। साथ ही शरीर के दूसरे अंगों पर गंभीर असर पड़ने लगता है।