फिरौती के लिए मासूम की अगवा कर हत्या करने के मामले में करीब 26 साल से फरार चल रहे बदमाश को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दबोचा है। आरोपी की पहचान कानपुर देहात, यूपी निवासी राज किशोर उर्फ बड़े लल्ला (55) के रूप में हुई है। उम्रकैद की सजा काट रहा राज किशोर वर्ष 1999 में पैरोल लेकर फरार हो गया था।
इसके बाद वह कभी गिरफ्तार नहीं हुआ। 2014 में दिल्ली की अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। इस बीच आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर जमानत का भी प्रयास किया था। वहां से मना होने पर अलग-अलग राज्यों में घूमता रहा। राज किशोर पेशे से दर्जी है, जहां भी जाता था, अपनी दर्जी की दुकान खोल लेता था। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि राज किशोर ने अपने साथी विजय के साथ मिलकर 15 दिसंबर 1993 को अपने मालिक मोहम्मद आशिक के आठ साल के बेटे को अगवा कर लिया था। उस समय राज किशोर आशिक की सिलाई की फैक्टरी में काम करता था।
आरोपी ने आशिक से बेटे को सकुशल छोड़ने के बदले 30 हजार रुपये की डिमांड की। रुपये लेने के बाद भी आरोपी ने मासूम की गला घोंटकर हत्या कर दी। बाद में शव को त्रिलोकपुरी के गटर में डाल दिया। पुलिस ने शव बरामद कर हत्या का मामला दर्ज किया। बाद में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1996 में राज किशोर को उम्रकैद की सजा हो गई। 1999 में आरोपी ने हाईकोर्ट से छह सप्ताह की पैरोल ली और गायब हो गया। पुलिस उसकी तलाश करती रही। वर्ष 2009 में आरोपी ने फरारी के समय हाईकोर्ट से जमानत की गुहार लगाई, लेकिन अदालत ने उसे मंजूरी नहीं दी। इसके बाद वर्ष 2014 में अदालत ने उसे भगोड़ा करार कर दिया।
ऐसे पकड़ा गया आरोपी
छानबीन के दौरान टीम को पता चला कि आरोपी अपने घर कानपुर देहात के आसपास छिपा हुआ है। टीम दो माह तक वहां डेरा डाले रही, लेकिन आरोपी छापेमारी के समय फरार हो जा रहा था। काफी प्रयासों के बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम ने आरोपी को खोड़ा कालोनी, गाजियाबाद से दबोच लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फरार होने के बाद चार साल पटना में रहा। इसके बाद 13 साल उसने जयपुर में बिताए। बाद में तीन साल उसने बरनाला, पंजाब में बिताए।