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Delhi: होटल बुक करने पर मुनाफे का झांसा देकर 25.50 लाख ठगे, इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर को बनाया निशाना

Tue, 02 Jan 2024 07:11 AM IST
विजय पुंडीर शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शुरुआत में पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने उनको लाभ दिया। ठगी का पता चलने पर मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने छानबीन के बाद मामला दर्ज कर लिया है।
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cyber crime - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साइबर ठग रोज ही नए-नए तरीकों से ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। इसी क्रम में ठगों ने इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर से साढ़े 25 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पीड़ित सुदर्शन कपूर को होटल बुक करने पर मुनाफा देने की बात कही थी। शुरुआत में पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने उनको लाभ दिया भी था।

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बाद में आरोपियों ने उनको एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ लिया। इसके बाद पीड़ित को निवेश करने के लिए उकसाकर धीरे-धीरे 25 लाख से अधिक की रकम निवेश करवा ली। बाद में पीड़ित को टेलीग्राम ग्रुप से निकालकर ब्लॉक कर दिया गया। ठगी का पता चलने पर मामले की शिकायत पुलिस से की गई। छानबीन के बाद अब पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, सुदर्शन कपूर वेस्ट विनोद नगर में रहते हैं। वह निजी इंश्योरेंस कंपनी में ट्रेनिंग मैनेजर हैं। पिछले दिनों उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक युवती ने मैसेज किया। अपना नाम आर्य बताकर युवती ने सुदर्शन को पार्ट टाइम जॉब का ऑफर दिया। युवती ने कहा कि उसे बस होटल बुक करना है, बदले में अच्छा कमीशन मिलेगा।
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बाद में अरविंद नामक युवक ने सुदर्शन को एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ दिया। पीड़ित ने ट्रायल के लिए 30 होटल की बुकिंग की। बदले में उनके खाते में 1164 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। काम शुरू करने के लिए शुरुआत में 10 हजार रुपये निवेश करने के लिए कहा। बदले में 16,738 रुपये दिए गए।

इसके बाद 52 हजार रुपये निवेश करने पर 83 हजार रुपये दिए गए। धीरे-धीरे आरोपियों ने उससे मोटी रकम निवेश करवा ली, लेकिन उसके खाते में रकम वापस नहीं आई। आरोपियों ने बताया कि काम पूरा नहीं होने की वजह से रकम नहीं आई। धीरे-धीर कर आरोपियों ने पीड़ित से 25 लाख से अधिक की रकम निवेश करवा ली।

इसके बाद उसे ग्रुप से निकालकर ब्लॉक कर दिया गया। ठगी का पता चलने पर मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने छानबीन के बाद मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। सीडीआर के अलावा बैंक खातों और दूसरे साक्ष्यों की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

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