एक चौंकाने वाले मामले में दिल्ली की एक कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारी के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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बता दें कि महिला पुलिस अधिकारी पर यह आरोप एक 13 वर्षीय लड़की ने लगाया है जिसने पहले अपनी टीचर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इसी केस की जांच कर रही महिला अफसर पर बाद में लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया।
अतिरिक्त सेशन जज विनोद यादव ने आदेश देते हुए कहा कि बच्ची ने अदालत को बताया है कि महिला जांच अधिकारी ने उसके साथ यौन शोषण किया और उसने जब महिला पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई तो अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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इसके साथ ही उक्त 13 वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने वाले सरकारी टीचर की तीसरी जमानत याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि अब भी हालात में कोई बदलाव नहीं आया है इसलिए टीचर को बेल नहीं दी जा सकती।
'महिला अधिकारी ने खड़े किए झूठे गवाह'
डेमो पिक
बच्ची के यौन शोषण केस की सुनवाई कर रहे सेशन्स जज ने अपने आदेश में कहा कि, आज इस केस में दो अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं। एक महिला जांच अधिकारी के खिलाफ यौन शोषण और झूठे गवाह तैयार करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने को लेकर है।
जज ने आगे कहा कि, यह कहना गलत नहीं होगा कि महिला जांच अधिकारी ने बच्ची से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी अध्यापक मनोज राठी को बचाने के लिए अकेले ही झूठे गवाह तैयार किए। परिस्थितियां जो पहले थी वही आज भी हैं मैं उनमें कोई अंतर नहीं पाता हूं। यही वजह है कि आरोपी अध्यापक की बेल याचिका खारिज की जाती है।
अदालत ने उत्तर पश्चिमी दिल्ली के मंगोलपुरी के एसएचओ को आरोपी महिला पुलिस अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। और इस मामले में 29 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।
हम महिला अधिकारी को बचाने की कोशिश करेंगेः पुलिस
हालांकि सीनियर पुलिस अधिकारियों का इस बारे में कहना है कि उन्हें अब तक कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि वह अपने वैधानिक विभाग से इस बारे में मशविरा करेंगे। पुलिस अधिकारियों ने ये भी कहा है कि हम महिला अधिकारी को बचाने की कोशिश करेंगे अगर उनके खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन पाए गए।
इसके लिए हम सिटी कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चैलेंज करेंगे। लेकिन अगर उनपर लगे आरोप सच हुए तो हम अवश्य ही केस दर्ज करेंगे और कानून के तहत कड़े से कड़ी कार्रवाई करेंगे।
बता दें कि पीड़ित लड़की ने अपनी शिकायत में महिला जांच अधिकारी पर आरोप लगाया है कि वह उसके पिता को धमका रही है कि बच्ची का दोबारा मेडिकल हो नहीं तो वो बच्ची को झूठे केस में फंसा देगी।
बच्ची के पिता पर भी है उसके यौन शोषण का आरोप
बच्ची ने ये आरोप लगाया है कि शुरु में महिला अधिकारी ने उसके साथ यौन शोषण किया और बाद में उसकी अनुमति के बिना ही उसे अस्पताल ले जाकर उसका इंटरनल मेडिकल परीक्षण कराया।
इस मामले में पहले से ही जांच कर रही पुलिस का कहना है कि जिस लड़की ने अपने टीचर और महिला अधिकारी पर शोषण का आरोप लगाया है वह अपने पिता पर भी यौन शोषण का आरोप लगा चुकी है। उसने अपने पिता के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई है।
इस मामले में बच्ची के स्कूल ने पुलिस को कथित तौर पर बच्ची के पिता का लिखित कबूलनामा सौंपा हुआ है कि उसके पिता उसके साथ लगातार यौन शोषण करते रहे हैं।
बता दें कि यह मामला सबसे पहले पिछले साल अगस्त में सामने आया था जब अमन विहार के एक सरकारी स्कूल के क्लास 5 में पढ़ने वाली छात्रा ने अपने टीचर से एक सवाल किया था जिसका जवाब उसने अकेले में मिलकर लेने के लिए कहा था।
लड़की का आरोप है कि इस बात की शिकायत करने जब अगले दिन बच्ची के माता पिता स्कूल आए तो स्कूलवालों ने एक सादे कागज पर उनके अंगूठे के निशान ले लिए।
इसके बाद टीचर ने ही वो कबूलनामा लिखा कि उसके पिता ने अपनी बेटी का लगातार यौन शोषण किया है। इसके बाद उस टीचर ने अपने अन्य सहकर्मियों के हस्ताक्षर भी उस पर ले लिए। बाद में पुलिस ने टीचर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस ने स्कूल टीचर और प्रिंसिपल के खिलाफ भी केस दर्ज किया है क्योंकि उन्होंने पुलिस को पीड़ित बच्ची के पिता के कबूलनामे के बारे में कुछ नहीं बताया।