अदालत ने बुधवार को जूनियर पहलवान सागर धनखड़ हत्या मामले में ओलंपियन सुशील पहलवान, अंतरराष्ट्रीय पहलवान अनिरुद्ध दहिया व 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और आपराधिक साजिश सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए। अदालत ने दो फरार आरोपियों के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं। अदालत ने कहा कि सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।
रोहिणी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद ने अपने 47 पृष्ठों के फैसले में आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य मामलों में आरोप तय करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 15 अक्तूबर तय करते हुए सभी आरोपियों को तलब किया है।
सुनवाई के दौरान उनसे पूछा जाएगा कि इन धाराओं में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के साक्ष्य है क्या वे अपना अपराध स्वीकार करते है या नहीं। आरोपियों के अपराध स्वीकार न करने पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। कोर्ट ने पूरी घटना को हिस्सों में बांटते हुए आरोप तय करने का निर्देश दिया है। छत्रसाल स्टेडियम में हुई घटनाओं के संबंध में आरोपियों के खिलाफ चोट और लूट के आरोप भी तय किए गए हैं।
शालीमार बाग की घटनाओं के संबंध में सुशील कुमार को छोड़कर 10 आरोपियों के खिलाफ अपहरण, गंभीर चोट पहुंचाने, दंगा करने सहित आपराधिक साजिश और अवैध रूप से जमा होने की धाराओं के तहत आरोप तय किए है। यही नहीं कोर्ट ने मॉडल टाउन में हुई घटना के संबंध में सुशील कुमार को छोड़कर 15 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, दंगा समेत अन्य धाराओं के तहत आरोप तय करने का भी निर्देश दिया है।
छत्रसाल स्टेडियम में पिटाई से हुई थी मौत
4 मई 2021 की रात छत्रसाल स्टेडियम में सागर और सोनू की कथित तौर पर पिटाई की गई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान सागर की मौत हो गई थी और घटना में सोनू महल गंभीर रूप से घायल हो गया था। एपीपी अतुल श्रीवास्तव ने आरोपियों की मंशा दिखाने के लिए घटना से जुड़ा वीडियो भी अदालत के समक्ष पेश किया।
कोर्ट ने 3 को आदेश सुरक्षित रख लिया था
अदालत ने 3 अक्टूबर 2022 को अभियोजन पक्ष और आरोपी व्यक्तियों की दलीलें सुनने के बाद जूनियर पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के मामले में आरोप तय करने पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में ओलंपियन सुशील कुमार के अलावा 17 अन्य आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष ने तर्क रखा कि सागर धनखड़ को मारने के लिए आरोपियों के इरादे को दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। सुशील के वकील ने कहा था कि यह धारा 302 (हत्या) का मामला नहीं है, बल्कि 304 (गैर इरादतन हत्या) आईपीसी का मामला है। इधर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि सभी के खिलाफ हत्या और अपहरण के आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।