रोहिणी कोर्ट ने हाल ही में नाबालिग से दुष्कर्म करने और उसे ईंट से वार कर हत्या की कोशिश मामले में दोषी को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 साल थी। पीड़िता अभी भी दोषी द्वारा पहुंचाई गई चोटों के लिए चिकित्सा उपचार ले रही है।
उसके वकील ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि वह एक आंख से देख नहीं पा रही है। पीड़िता का अपहरण कर उसे नशीला इंजेक्शन लगाया गया और उसके बाद दोषी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। वर्ष 2017 में स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अजय नागर ने 4 मार्च को पारित आदेश में कहा कि समाज में ऐसी घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। समाज को यह कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराध किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) के तहत नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
साथ ही, भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत उसकी हत्या का प्रयास करने के अपराध के लिए दूसरी बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें आईपीसी की धारा 363, 366, 328 और 506 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए भी दोषी ठहराया गया है, जिसके लिए पांच से लेकर सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।