डिजिटल युग में पुस्तकों को खरीदकर पढ़ने का अपना अलग ही आनंद है। पुरानी कॉमिक्स का दौर एक बार फिर लौट आया है। प्रगति मैदान में चल रहे दिल्ली पुस्तक मेला परवान पर है। इसमें पुरानी कॉमिक्स पाठकों का ध्यान खींच रही हैं।
अगर आप भी पुरानी कॉमिक्स को पढ़ना व खरीदना चाहते हैं तो यह मेला आपके लिए खास है। यहां चाचा चौधरी, पंचतंत्र, कैप्टन ध्रुव व नागराज जैसे सुपरहीरो, अकबर-बीरबल, नंदन, बाल हंस, चंपक, चंदामामा और नन्हें सम्राट जैसी कॉमिक्स की पुरानी व नई प्रतियां बिक रही हैं। ऐसे में पुस्तकों के शैदाइयों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। इन्हें खरीदने व पढ़ने के लिए लोगों की लंबी कतार लग रही हैं। इन कॉमिक्स को पढ़ने के दीवाने बच्चे ही नहीं, बल्कि युवा व बुजुर्ग लोग भी हैं।
मेले में रोजाना पुस्तक प्रेमियों की भीड़ उमड़ रही है। एक दौर था, जब चाचा चौधरी, बिल्लू जैसी कॉमिक्स ही मनोरंजन का साधन हुआ करती थीं। इन कॉमिक्स को खरीदते समय अक्सर लोगों के मुंह से इन बातों को आसानी से सुना जा सकता है। पुरानी कॉमिक्स के नए संस्करण में प्रतिष्ठित भारतीय हास्य चरित्र चाचा चौधरी की नाटकीय वापसी देखी जा रही है।
कई अभिभावक भी इन स्टॉल पर अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। मयूर विहार से अपने बच्चों को लेकर आए योगेश दहिया ने कहा कि मौजूदा समय में इंटरनेट पैर पसार रहा है। ऐसे में बच्चों को इन कॉमिक्स के बारे में बताना बहुत जरूरी है।
सोशल मीडिया ने कम की कॉमिक्स की महत्ता : मेले में कॉमिक्स लेकर पहुंचे पुस्तक विक्रेता और प्रकाशकों का कहना है कि सोशल मीडिया से कॉमिक्स की दुनिया सिमट गई है। लेकिन, इनको चाहने वाले एक बार फिर वापस लौट रहे हैं। वह इसके पीछे की वजह नैतिक मूल्यों को बताते हैं।
वह कहते हैं कि सोशल मीडिया से लोग अब ऊब रहे हैं। ऐसे में वह पुराने दौर को वापस पसंद कर रहे हैं। मेले में 50 रुपये से लेकर 150 रुपये तक की कॉमिक्स बिक रही हैं। कॉमिक्स विक्रेता हेमंत गुप्ता बताते हैं कि पहले करीब हजारों में वह मैग्जीन, नॉवेल, बुक सीरिज बिकते थे। लेकिन, अब इनकी बिक्री करीब 50 फीसदी तक कम हो गई है।
साहित्य की पुस्तकें भी खींच रही हैं लोगों का ध्यान
मेले में साहित्य पुस्तक स्टॉल पर भी लोगों की अधिक संख्या जुट रही है। युवाओं के बीच इतिहास, साहित्यिक, घुमक्कड़ी समेत कहानियों की किताबों के प्रति अधिक रूचि देखने को मिल रही है। साहित्य में प्रेमचंद, फणीश्वर नाथ रेणु, मंटो, दिनकर, गीतांजलि श्री के साथ-साथ नए युवा लेखकों की पुस्तकें भी पाठकों को खूब लुभा रही हैं।