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Delhi Assembly Elections : दिल्ली करती है दिल खोलकर एकतरफा वोट, हां... 2013 रहा अपवाद; कुछ ऐसा है इतिहास

Wed, 15 Jan 2025 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

हालांकि, इस मामले में अपवाद 2013 रहा है। दिल्ली की सियासत में आप की एंट्री के बाद जनादेश खंडित रहा और पहली बार दिल्ली में आप-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई, लेकिन यह सियासी पैंतरा नाकाम रहा।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव में दिल्ली के लोग पार्टी विशेष के लिए दिल खोलकर एकतरफा वोट करते हैं। हालांकि, इस मामले में अपवाद 2013 रहा है। दिल्ली की सियासत में आप की एंट्री के बाद जनादेश खंडित रहा और पहली बार दिल्ली में आप-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई, लेकिन यह सियासी पैंतरा नाकाम रहा। 49 दिनों में ही गठबंधन सरकार धराशायी हो गई। इसके बाद वर्ष 2015 में आप ने 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिलीं। 2020 में आप ने 62 सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा को आठ सीटें मिलीं।

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दरअसल, राजधानी में विधानसभा और महानगर परिषद के 12 चुनाव हुए हैं। इनमें राजधानी वासियों ने छह बार कांग्रेस में विश्वास जताया है, जबकि एक-एक बार भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी व भाजपा के माथे जीत का सेहरा बांधा। वहीं, दो बार आप को जिताया। राजधानी में 1952 से लेकर 2008 तक विधानसभा और महानगर परिषद के चुनावों में दो प्रमुख दलों के बीच टक्कर हुई थी। इसमें कई अन्य दलों ने चुनाव में ताल ठोंककर तीसरी ताकत बनने की कोशिश की, लेकिन दोनों दलों का विकल्प दिल्ली ने नहीं माना। वर्ष 2013 में अन्ना आंदोलन से निकली आप ने जबरदस्त दस्तक दी और पहले चुनाव में दूसरे स्थान पर रही।

1952 से 2008 तक लगातार मिला स्पष्ट बहुमत
1952 के पहले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप करते हुए जीत हासिल की थी। 1956 में विधानसभा खत्म कर दी गई और 1966 में महानगर परिषद का गठन हुआ। अगले साल हुए चुनाव में भारतीय जनसंघ ने बड़ी जीत हासिल कर सरकार बनाई। इसके बाद 1972 के चुनाव में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया। 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, जबकि 1983 में कांग्रेस ने जीत हासिल की। 
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वर्ष 1991 में महानगर परिषद के स्थान पर विधानसभा का फिर से गठन हुआ और 1993 में चुनाव हुए। इसमें भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। 1998 में कांग्रेस ने एक बार क्लीन स्वीप करके सरकार बना ली और 2003 व 2008 के चुनाव में भी भारी जीत हासिल की। 2013 में आप के दिल्ली की सियासत में दस्तक देने के बाद सियासी गणित उलट गया। इसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई। भाजपा पहले स्थान व आप ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था।

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