विजेंद्र गुप्ता, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के छात्र रहे। उन्होंने यहां से एमकॉम की पढ़ाई की। गुप्ता छात्र राजनीति में भी काफी सक्रिए रहे, वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे।
विजेंद्र गुप्ता तीन बार रोहिणी क्षेत्र से निगम पार्षद रहे, वे भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पद पर भी थे।
उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत साल 1983 में जनता विद्यार्थी मोर्चा के सचिव पद से की। विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी क्षेत्र को आदर्श नगरपालिका के तौर पर विकसित किया।
2013 में मुख्यमंत्री सीट से लड़ा चुनाव:
साल 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद विजेंद्र गुप्ता का कद और बढ़ गया। उन्हें दिल्ली की सबसे बड़ी सीट नई दिल्ली से भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा गया। हालांकि वो इसमें कुछ खास नहीं कर पाए।
इन चुनावों में गुप्ता को 17,952 वोट मिले, बता दें उनका सामना तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित और केजरीवाल से था। केजरीवाल को 44 हजार और शीला दीक्षित को 18,405 वोट मिले थे।
2015 में बढ़ा कद:
साल 2015 में गुप्ता को सबसे बडी जीत हासिल हुई। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को करीब पांच हजार वोटों से हराया। वे भाजपा के उन तीन विधायकों में से एक थे, जो आम आदमी पार्टी की आंधी के बावजूद अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। इन चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीती थी।
गुप्ता को 16 अप्रैल 2015 को दिल्ली विधानसभा में विपक्ष का नेता भी नियुक्त किया गया।
इन कमेटियों का हिस्सा रहे विजेंद्र गुप्ता:
विजेंद्र गुप्ता साल 1997-98 में एमसीटी की लॉ एंड जनरल कमेटी का हिस्सा थे।
1998-2010 तक विजेंद्र गुप्ता स्टैंडिंग कमेंटी के मेंबर रहे।
2007-2009 के बीच वो इसी गुप्ता स्टैंडिंग कमेटी के चैयरमन बने।