आसमान में जहरीली धुंध की मोटी परत से दिल्ली-एनसीआर में सांसों पर आपातकाल की स्थिति रही। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शनिवार को साल के सबसे खराब स्तर 446 अंक पर पहुंच गया। गाजियाबाद समेत एनसीआर के शहरों में भी एक्यूआई 400 के पार रहा। सांस लेने में हो रही दुश्वारी के बीच लोग मास्क पहने नजर आए। आंख में जलन की दिक्कत भी हुई। वायु प्रदूषण का असर दिल्लीवालों की औसत आयु पर भी पड़ रहा है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे व खुंर्जा में हादसे, अमरोहा में एक की मौत
दादरी/अमरोहा में मौसम के पहले घने कोहरे के चलते दृश्यता कम होने से शनिवार को यूपी में अलग-अलग स्थानों पर तीन दर्जन से अधिक गाड़ियों की आपस में भिड़ंत हो गई। इससे कई जगह जाम की स्थिति रही। हादसों में 35 से अिधक लोग घायल हो गए। गाड़ियों को हटाने के लिए क्रेन की मदद लेनी पड़ी।
पश्चिमी विक्षोभ का दिखा असर
उत्तर पश्चिमी भारत के विभिन्न हिस्सों में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का असर नजर आना शुरू हो गया है। यह पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और उसके आस-पास के इलाकों पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में दिख रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की चोटियों पर हल्की बारिश और हिमपात का अनुमान है। शनिवार को छिटपुट बादल की आवाजाही देखने को मिली। सुबह से ही मौसम में ठंडक बनी हुई थी। अधिकतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
घुट रहा है दिल्ली का दम
राजधानी में वायु प्रदूषण साइलेंट किलर बन चुका है, जो हर साल सैकड़ो लोगों की जान ले रहा है और असमय मौतों के लिए जिम्मेदार भी। दिल्ली को लेकर की गई नेचर पोर्टफोलियो के जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि राजधानी की हवा कई साल से लगातार लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है। यह अध्ययन 2019 से 2023 के बीच दिल्ली में हवा में मौजूद जहरीले कणों पीएम10 और पीएम2.5 पर आधारित है। ये बेहद बारीक कण होते हैं, जो सांस के साथ सीधे फेफड़ों में चले जाते हैं और कई बीमारियों की वजह बनते हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि दिन के अलग-अलग समय में प्रदूषण का असर अलग होता है। खासतौर पर शाम के समय जब लोग ऑफिस से घर लौटते हैं, तब शरीर में जाने वाले प्रदूषित कणों की मात्रा ज्यादा होती है। स्टडी के अनुसार, दीपावली जैसे त्योहारों और कुछ खास मौकों पर प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है, जबकि कोविड़-19 लॉकडाउन के दौरान हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार देखा गया था।