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Delhi AIIMS: एलाइजा किट से जल्द हो सकेगी पार्किंसन-अल्जाइमर की पहचान, खून व लार की मदद से बीमार का लगाएंगे पता

Fri, 07 Apr 2023 10:55 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

नई तकनीक में लार और खून की जांच से पता लगाया जा सकता है कि अगले पांच या दस सालों में ऐसे कोई विकार शरीर में विकसित हो रहे रहे हैं या नहीं। इस विधि में सूक्ष्म नैनोस्केल कण, एक्सोसोम की जांच की जा सकेगी।
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एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पार्किंसन-अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों का पता आने वाले दिनों में एलाइजा किट से लगाया जा सकेगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के बायोफिजिक्स विभाग में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सरोज कुमार ने इन विकारों का पता लगाने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के अगले चरण में एलाइजा किट को तैयार किया जाएगा। 

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नई तकनीक में लार और खून की जांच से पता लगाया जा सकता है कि अगले पांच या दस सालों में ऐसे कोई विकार शरीर में विकसित हो रहे रहे हैं या नहीं। इस विधि में सूक्ष्म नैनोस्केल कण, एक्सोसोम की जांच की जा सकेगी, जिसकी मदद से इनकी जांच की जा सकेगी। दरअसल शरीर में ऐसे विकार होने के दौरान तंत्रिका कोशिकाओं से लार, रक्त से जैव तरल पदार्थों का रिसाव होता है। एम्स ने इस नई विधि को पेटेंट करवाने के लिए भी आवेदन किया है।

डायग्नोस्टिक केंद्रों पर भी हो सकेगी जांच 
किट से जांच शुरू होने के बाद पार्किंसन-अल्जाइमर जैसे रोगों की पहचान अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों पर आसानी से हो सकेगी। वर्तमान में इनकी जांच के लिए व्यापक उपकरण की जरूरत होती है। न्यूरोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपा राजन के सहयोग से डॉ. सरोज ने सामान्य प्रयोगशाला उपकरणों और बहुत कम संसाधनों का उपयोग करके इस दिशा में सफलता हासिल की। 
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उम्र के साथ बढ़ जाती है समस्या
उम्र बढ़ने के साथ अल्जाइमर और पार्किंसन रोग की समस्या बढ़ जाती है। देश में लाखों की संख्या में लोग इससे पीड़ित है। इस रोग में तंत्रिका कोशिकाएं समय के साथ अपनी क्षमताओं को खो देती हैं। मस्तिष्क में कोशिकाएं भी काम नहीं कर पाती, जिस कारण यह रोग होता है। डॉ. सरोज के अनुसार अभी सालों तक इन रोग के लक्षण नहीं दिख पाते। इसलिए नई तकनीक को बनाने के दौरान बुजुर्ग स्वस्थ नियंत्रणों की तुलना करते हुए अल्जाइमर और पार्किंसन रोग में नए संभावित युवाओं की पहचान की गई। फिलहाल अनुसंधान दल एक प्रोटोटाइप किट विकसित करने और बड़ी आबादी में समाज आधारित स्क्रीनिंग करने की दिशा में काम कर रहा है।
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