भारत के चमगादड़ों की स्थिति (2024-2025) नामक रिपोर्ट को 34 शोधकर्ताओं की टीम ने किया तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देश में चमगादड़ों की प्रजातियों को सबसे ज्यादा खतरा इंसानी गतिविधियों से है। खराब योजना के साथ हो रहा शहरी विस्तार, पर्यटन और सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग इन जीवों के लिए गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। भारत के चमगादड़ों की स्थिति (2024-2025) नामक इस रिपोर्ट को 34 शोधकर्ताओं की टीम ने तैयार किया है, जिसमें 27 शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग रहा। रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। देश में चमगादड़ों की करीब 135 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये जीव पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये बीज फैलाने, पौधों के परागण और कीट नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा समय में देश में चमगादड़ों की सात प्रजातियां संकट में हैं, जिनमें एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय, पांच लुप्तप्राय और एक असुरक्षित श्रेणी में शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि असल स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि कई प्रजातियों के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।