-साकेत कोर्ट ने नीलम नय्यर के पक्ष में जारी किया उत्तराधिकार प्रमाणपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। माता-पिता के नाम बैंक खाते में जमा रकम पर बेटी का भी उतना ही कानूनी हक है, जितना अन्य कानूनी वारिसों का है। इसी आधार पर साकेत कोर्ट ने एक बेटी के पक्ष में उसके दिवंगत माता-पिता के संयुक्त बैंक खाते में जमा 25.78 लाख रुपये के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है। भाई और बहन ने भी पिता के पैसे पर अपने हिस्से के लिए दावा नहीं किया और रकम पर बहन के अधिकार पर सहमति जताई। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट की न्यायाधीश तरुणप्रीत कौर ने नीलम नय्यर की याचिका पर यह फैसला सुनाया। नीलम ने अपने माता-पिता रतन एल बेहल और अविनाश बेहल के नाम जमा रकम हासिल करने के लिए अदालत से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगा था। अदालत में पेश मामले के अनुसार, रतन एल बेहल और उनकी पत्नी अविनाश बेहल की फरवरी साल 2024 में मृत्यु हो गई थी। दोनों ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। उनकी तीन संतानें बेटी नीलम नय्यर, बेटी नीना टंडन और बेटा संजीव बेहल ही उनके कानूनी वारिस थे। अदालत में पेश जीवित सदस्य प्रमाणपत्र में भी इन तीनों के नाम ही दर्ज थे।