एनसीएपी के उद्देश्य और लक्ष्य सराहनीय रहे हैं। इसमें खास बात यह है कि उद्योगों या वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर ध्यान न देकर धूल कण को नियंत्रण करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके प्रभावी परिणाम के लिए धन का संतुलित उपयोग महत्वपूर्ण है। -सुनीता नारायण, महानिदेशक, सीएसई
शहरों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है। प्रगति का मापदंड बनाने के लिए इन मानकों के उपयोग के प्रभावों और इनके वास्तविक सुधार पर असर के बारे में गंभीर प्रश्न हैं। -अनुमिता रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई
एनसीएपी बनाम एसवीएस
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा व जबलपुर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण (एसवीएस) के तहत अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन एनसीएपी के तहत पीएम 10 को कम करने में खराब प्रदर्शन किया है। दिल्ली एसवीएस में नीतिगत उपायों के कार्यान्वयन के लिए 9वें स्थान पर थी, लेकिन एनसीएपी के तहत नीचे थी और शून्य स्कोर प्राप्त किया।
स्वच्छ तकनीक पर हो काम
15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत मौजूदा वित्त पोषण प्रणाली 2025-2026 में समाप्त हो जाएगी। स्वच्छ तकनीकियों, ईंधन, हरित बुनियादी ढांचे और शहरी डिजाइन समाधानों पर क्षेत्रवार कार्रवाई में तेजी लाने के लिए क्षेत्रीय वित्त पोषण रणनीतियों को अधिक कुशलता से लागू करने की आवश्यकता है। सीएसई का कहना है कि कचरे से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए।