डॉक्टरों की मानें तो इसमें अस्पताल के सुरक्षागार्ड, एमआर और कुछ पैरामेडिकल स्टाफ भी शामिल हैं। ये लोग प्रति मरीज सौ से दो सौ रुपये लेकर पैथोलॉजी में जाकर नमूना जमा करा देते हैं। इतना ही नहीं, मरीज अगले दिन रिपोर्ट भी इन्हीं कर्मचारी से लेता है।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी ने बताया कि मरीजों से रिश्वत लेकर इलाज करना एकदम गलत है। प्रबंधन इसके खिलाफ है। जैसे ही उन्हें इस मामले की जानकारी हुई।
वीडियो की जांच के बाद दोषी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी विभागाध्यक्षों और कर्मचारियों को चेतावनी भी दे दी गई है।
एमआर के प्रवेश पर फिर उठे सवाल
आरएमएल में इस घटना के बाद डॉक्टरों ने ही एमआर के प्रवेश पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर डॉक्टरों के केबिन तक पहुंचकर प्राइवेट कंपनियों की दवाओं का प्रचार करने वाले ये एमआर अस्पताल परिसर में मौजूद रहते हैं। यही मरीज को लेकर कर्मचारियों के पास पहुंचते हैं और पिछले दरवाजे से काम निकालने के लिए रकम मांगते हैं।