छह साल पुराने हत्या के एक मामले में मंगलवार को दो महिलाओं सहित छह लोगों को दोषी ठहराते हुए नूंह के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शशि चौहान ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों को एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा।
जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को भोंडसी जेल भेज दिया गया। छह साल बाद हत्या के मामले में न्याय मिलने के बाद जहां पीड़ित पक्ष ने अदालत का आभार जताया, वहीं दोषी पक्ष ने फैसले से असहमति जताते हुए उच्च न्यायालय में उसे चुनौती देने की बात कही है।
जानकारी के मुताबिक, 23 जून 2011 को फिरोजपुर झिरका के गांव नांगल मुबारिकपुर निवासी नूरुद्दीन ने पुलिस को शिकायत में कहा था कि उन्होंने अपनी दो लड़कियों शबनम व शकूनत की शादी 22 जून 2011 को फिरोजपुर झिरका के गांव दोहा निवासी साजिद व इरशाद के साथ की थी।
लड़की के पिता का आरोप था कि शबनम को 22 जून की रात दोषियों ने मार दिया। पीड़ित ने पुलिस से मांग की कि मामले की जांच की जाए व आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हो। पुलिस ने मामले में 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई कर शव को जिला अस्पताल मांडीखेड़ा भिजवा दिया था।
जहां 24 जून को शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दो महिलाओं सहित सात लोगों मृतका के पति साजिद, देवर इरशाद, सास जमीला, ननद असमीना, ससुर जुहुरुद्दीन, ताहिर व हासम को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
एक आरोपी बरी
मामले की जांच के दौरान 15 जुलाई 2011 को आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ट्रायल के दौरान सबूतों व गवाहों के आधार पर नूंह के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शशि चौहान ने एक आरोपी हासम को बरी कर दिया, जबकि अन्य छह आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई।