अदालत ने बाघ के अंगों के साथ गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराधियों को यदि राहत मिली तो उनके फरार होने और पुराने तरीके दोबारा अपनाने की पूरी संभावना है।
विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने आरोपी नरेश को राहत देने से इनकार कर दिया। उसके पास से बाघ की खोपड़ी के टुकड़े, हड्डियां, दांत और नाखून बरामद किए गए थे। अदालत ने कहा सारे सबूत जमानत के सवाल पर फैसला करने के समय यह मानने के लिए पर्याप्त हैं कि अभियोजन पक्ष का मामला विश्वास के योग्य है।
अदालत ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत इस तरह के अपराध के लिए तीन साल की न्यूनतम सजा और सात साल की अधिकतम सजा का प्रावधान है। न्यायाधीश ने कहा इस तरह के अपराधियों के फरार होने और दोबारा पुराने तरीके अपनाने की पूरी संभावना है। इस तरह की परिस्थितियों में मुझेे यह मामला जमानत के योग्य नहीं लगता। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 7 सितंबर 2013 को दिल्ली पुलिस और महाराष्ट्र वन विभाग ने नरेश और सूरजभान नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था और उनकी कार से बाघ की खोपड़ी के टुकड़े, हड्डियां, दांत और नाखून जब्त किए गए थे। इसके अलावा उनके पास से 2,70,000 की नगदी भी बरामद हुई थी।