कारपोरेट कंपनियों के खाते हैक कर उनसे लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने वाले साइबर ठग गिरोह के वेद प्रकाश शर्मा उर्फ ललित निवासी नोएडा, मोनू कुमार उर्फ ओम प्रकाश निवासी सहरसा और बिंदेश्वर दुबे निवासी करावल नगर दिल्ली को साइबर सेल पुलिस टीम ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने 27-28 अक्तूबर, 2016 की रात एनआईटी थाना स्थित अल्फा इंजीनियर्स नाम की कंपनी के खाते से हैकिंग कर निकाले गए 12 लाख रुपये के जुर्म में इन तीनों को पकड़ा है। साइबर धोखाधड़ी से वेदप्रकाश के खाते में ट्रांसफर किए गए 2 लाख रुपये भी पुलिस ने बरामद किए हैं। वहीं बाकी रकम पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में ट्रांसफर की गई। पुलिस गिरोह के मास्टर माइंड को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।
कैसे करते हैं साइबर ठगी
वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि उसके गिरोह में पांच लोग शामिल हैं। कुछ सदस्यों का काम कॉरपोरेट कंपनियों के अधिकारियों की ई-मेल या वेबसाइट हैक कर कंपनी के बैंक खाते का नंबर, किस अधिकारी के नाम खाता है और कौन सा फोन नंबर खाते में रजिस्टर्ड है, इसकी जानकारी एकत्रित करना है।
दूसरे साथी खाते के रजिस्टर्ड फोन नंबर को हैक कर खाते से ऑनलाइन ट्रंाजेक्शन के लिए जरूरी वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मंगाते हैं। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए फिर नए खातों की खोज की जाती है जिनमें धन ट्रांसफर करवाने के बाद आसानी से निकाला जा सके। इस पूरे खेल में सभी साथियों का हिस्सा तय होता है। कंपनियों के खाते हैक कर बैंक खातों की जानकारी जुटाने वाला गिरोह का मास्टर माइंड अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
अल्फा इंजीनियर्स के खाते से निकाले थे 12 लाख रुपये
साइबर सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि एनआईटी स्थित अल्फा इंजीनियर्स के डायरेक्टर संजीव जुनेजा ने 2 नवंबर, 2011 को कंपनी के खाते से 12 लाख रुपये ऑनलाइन ठगी का केस दर्ज कराया था। मामले की जांच साइबर सेल ने शुरू की।
जांच में पाया गया कि संजीव जुनेजा का वोडाफोन नंबर 27 और 28 अक्तूबर को दो बार बंद हुआ। 27 अक्टूबर की शाम फोन बंद होने पर संजीव ने कस्टमर केयर से बात कर इसे दोबारा चालू करवा लिया। 28 अक्टूबर की रात 2 बजे उनका नंबर दोबारा बंद हुआ लेकिन इस बार एकदूसरे फोन में यह नंबर चालू हुआ।
इस दौरान इस नंबर पर बैंक की ओर से ओटीपी भेजा गया। इस ओटीपी का इस्तेमाल कर साइबर ठगों ने कंपनी के खाते से 12 लाख रुपये नोएडा, कोलकाता और महाराष्ट्र स्थित बैंक शाखाओं में ट्रांसफर कर दिए गए। सुबह फोन बंद मिलने पर संजीव ने वोडाफोन केयर पर कॉल कर इसे दोबारा चालू करवाया।
पुलिस ने वोडाफोन कस्टमर केयर से संपर्क कर 27-28 की रात संजीव जुनेजा के नंबर पर एक्टिवेट हुए सिम की जानकारी मांगी। बताया गया कि यह सिम गुड़गांव और गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाले दो लोगों ने पोस्टपेड कनेक्शन के नाम पर मंगवाए थे।
कंपनी ने इन्हें सिम तो भिजवाए लेकिन नो योर कस्टमर (केवाईसी) दाखिल नहीं होने की वजह से इन्हें एक्टिवेट नहीं किया गया था। जांच में पता चला कि 27 अक्टूबर की शाम साइबर ठगों ने वोडाफोन कस्टमर केयर पर फोन कर खुद को संजीव जुनेजा बताते हुए फोन गिरने और पुराना नंबर नए सिम (जो उन्होंने पोस्टपेड कनेक्शन के नाम पर पहले ही मंगाया था) पर एक्टिवेट कराया था। हालांकि संजीव ने इसे फिर से चालू करवा लिया था।
28 अक्टूबर की रात 2 बजे फिर साइबर ठगों ने यही प्रक्रिया अपना कर दूसरे सिम पर संजीव जुनेजा का नंबर एक्टिवेट करा ओटीपी मंगवाया था। यह ओटीपी व्हाट्सऐप के जरिये महाराष्ट्र में बैठे मास्टरमाइंड को भेजा गया जिसने तीन खातों में 12 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए।
पुलिस ने उन पतों पर छानबीन की जहां वोडाफोन के दो पोस्टपेड सिम दिए गए थे। पुलिस को नोएडा के उस पते से वेद प्रकाश शर्मा उर्फ ललित मिला। सख्ती से पूछताछ में उसने साथी मोनू और बिंदेश्वर दुबे के बारे में जानकारी दी।
वोडाफोन के कॉरपोरेट कनेक्शन निशाने पर
मोनू उर्फ ओमप्रकाश ने बताया कि उसने वोडाफोन कस्टमर केयर की नेट चैटिंग के जरिये नए सिम में संजीव जुनेजा का नंबर एक्टिवेट करवाया था। उसने बताया कि नेट चैटिंग की सुविधा सिर्फ वोडाफोन में ही है इसलिए वह इसी कंपनी के कॉरपोरेट कनेेक्शन ही हैक करता है। अन्य कंपनियों में नेट चैटिंग सुविधा नहीं होने की वजह से उनका सिम हैक करना आसान नही होता।
यह गिरोह पूरे भारत में लगभग दस कंपनियों के खातों से नेट बैंकिंग के जरिये करोड़ों रुपये निकाल चुका है, तीनों ही आरोपी पहली बार गिरफ्तार हुए हैं। मास्टरमाइंड भी जल्दी पकड़ में आएगा। - राजेश चेची, एसीपी क्राइम