दिल्ली पुलिस के लाख दावों के बीच राजधानी में क्राइम के ग्राफ में तेजी से इजाफा हो रहा है। सुनने में थोड़ी हैरत जरूर होगी लेकिन यह हकीकत है कि राजधानी में औसतन 44 लोग रोजाना किसी न किसी तरह लूटपाट और झपटमारी का शिकार हो जाते हैं।
पुलिस भी ऐसे अपराधों को गंभीरता से नहीं लेती है। यही वजह है कि स्ट्रीट क्राइम (झपटमारी और लूटपाट) की वारदातों में रोजाना वृद्धि हो रही है। दूसरी ओर वाहन चोरी के मामले में भी राजधानी का कोई सानी नहीं है। यहां औसतन 106 वाहन रोजाना चोरी हो जाते हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध का ग्राफ बढ़ने के साथ केस वर्क आउट प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है। पहले के मुकाबले पुलिस ज्यादा बदमाशों को पकड़ने में कामयाब हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2016 के शुरुआती पांच माह में 4,252 लोगों के साथ झपटमारी की वारदातें हुई।
रोजाना 106 लोगों की गाड़ियां होती हैं चोरी
पुलिस
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पिछले साल यानी वर्ष 2015 में इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,840 था। वहीं लूटपाट के मामलों में बात करें तो शुरुआती पांच माह में 2,380 वारदातें हुई हैं।
यदि इन पर नजर डाली जाए तो मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक रोजाना 28 लोगों के साथ झपटमारी और 16 लोगों के साथ लूटपाट की वारदातें हो रही हैं।
दूसरी ओर शुरुआती पांच माह के दौरान 16,251 वाहन चोरी हो चुके है। यानि औसतन 106 गाड़ियां चोरी हो जाती हैं। वहीं अन्य चोरियों का आंकड़ा 32,028 पर पहुंचा है।
यानी करीब 211 लोगों का कोई न कोई सामान प्रतिदिन चोरी हो जाता है। इनमें घरों में चोरी और सेंधमारी के मामले शामिल नहीं है।मामले पर दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता व डीसीपी राजन भगत का कहना है कि राजधानी में क्राइम की घटनाओं में तो इजाफा हुआ है, लेकिन केस वर्क आउट प्रतिशत बढ़ा है।
पुलिस ज्यादातर मामलों में बदमाशों को पकड़ने में कामयाब रही है। जहां तक अपराधों का ग्राफ बढ़ने की बात है। जागरूकता बढ़ने की वजह से लोग ज्यादा शिकायतें लेकर थाने पहुंच रहे हैं।