महेंद्र भाटी हत्याकांड में डीपी यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। मंगलवार शाम जब अमर उजाला टीम डीपी की कोठी पर गई तो वहां सिर्फ गार्ड मिला अनिल तिवारी। कितने ही अच्छे और बुरे दिनों की गवाह यह वही कोठी है, जो कभी गुलजार रहा करती थी।
लोगों का हुजूम लगा रहता था। जिस दौर में डीपी सपा मुखिया मुलायम सिंह का चहेता था, उस दौर (1989-90) में यहां मुलायम सिंह भी आए थे।
जबकि 1992 में इस कोठी की कुर्की कराई गई थी। उस समय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे, उन्हीं की सख्ती से कुर्की हो पाई थी। अब कोठी सूनी रहती है।
महेंद्र फौजी और सतवीर गुर्जर की गैंगवारः सूत्र बताते हैं कि जब 90 की शुरुआत में महेंद्र फौजी और सतवीर गुर्जर में गैंगवार चल रही थी, तब डीपी यादव महेंद्र फौजी का करीबी था और सतवीर गुर्जर महेंद्र भाटी का। तभी से दोनों में दूरियां बढ़ती चली गईं।
गार्ड बोला-सजा के बाद डीपी के पिता चुप
देवरिया निवासी गार्ड अनिल तिवारी ने बताया कि वह यहां तीन माह से गार्ड है। डीपी यादव एक माह पहले कोठी पर आया था। गार्ड के मुताबिक, कोठी में डीपी के पिता तेजपाल रहते हैं।
डीपी को सजा का पता चलने के बाद से वे और खामोश हो गए हैं। दिनभर उनसे मिलने कोई नहीं आया। शाम को वह घर से अपने एक परिचित के साथ कहीं गए हैं।
कोर्ट ने जब से डीपी को दोषी करार दिया था। तब से सीबीआई की टीम और पुलिस ने तीन बार कोठी पर दबिश दी थी।