भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया रियल इस्टेट के कारोबार से भी जुड़े रहे हैं। दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल पद को छोड़कर राजनीति में आने के बाद वह काफी सक्रिय रहे।
जान का खतरा होने से उन्होंने अपनी लाल रंग की पजेरो को बुलेट प्रूफ करा रखा था। वह जब भी क्षेत्र में जाते, तब इसी गाड़ी में ही सवार होकर जाते थे।
ब्रजपाल के भतीजे राहुल चौधरी ने बताया कि उनकी पजेरो कार की विंडशील्ड का वाइपर ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा था। शाम करीब पांच बजे उन्हें मुरादनगर स्थित सुराना गांव में एक शोक सभा में जाना था।
निजी चालक मोहन से स्कार्पियो में चलने को कहा
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वाइपर खराब होने से उन्होंने निजी चालक मोहन से स्कार्पियो में चलने को कहा। स्कार्पियो में सवार होते ही ब्रजपाल की हत्या की साजिश रचने वालों को ठीक मौका मिल गया और वहीं से हमलावरों ने योजना तैयार कर ली।
बृहस्पतिवार शाम करीब सात बजे वह सुराना गांव से चल पड़े। 15 मिनट बाद ही जैसे वह रावली रोड पहुंचे, वहां हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसा दीं।
योजना में रह गई कमी
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ब्रजपाल की हत्या की साजिश रचने वाला परिपक्व हो सकता है, लेकिन घटना को अंजाम देने वाले लोग नए बदमाश हैं।
ब्रजपाल के बेटे राजनीति से दूर
ब्रजपाल तेवतिया पर हमले के बाद एडीजी दलजीत चौधरी पत्रकारों से बातचीत करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
कोई भी कुख्यात अपराधी घटनास्थल पर एके-47 और ऑटोमैटिक हथियार व अपनी गाड़ी छोड़कर नहीं भागेगा। एक से दो लोगों ने मिलकर यह योजना तैयार की हो, जिनकी रंजिश ब्रजपाल तेवतिया से चली आ रही हो।
ब्रजपाल के बेटे राजनीति से दूर
ब्रजपाल के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा अरुण आईआईटी कानपुर का टॉपर है। छोटा बेटा वरुण काइट कॉलेज का टॉपर है। दोनों बड़े सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़े हुए हैं।
ब्रजपाल ने अपने दोनों बेटों को राजनीति से शुरू से ही दूर रखा। ब्रजपाल के भतीजे राहुल बताते हैं कि उन्हें रास्ते से हटाने के बाद परिवार में ऐसा कोई नहीं बचता जो मुरादनगर से चुनाव लड़ता, ऐसे में प्रतिद्वंद्वी का रास्ता साफ हो जाता।