कासना कोतवाली क्षेत्र में तीन वर्ष पहले मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से दुष्कर्म मामले में एडीजे प्रथम रामनरेश मौर्य ने पश्चिम बंगाल निवासी नेपाल को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में दस-दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजा साथ चलेंगी।
अदालत ने उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मूल रूप से पश्चिम बंगाल निवासी महिला कासना कोतवाली क्षेत्र में रहती है और घरों में काम करती है और उसका पति मजदूरी करता है।
शासकीय अधिवक्ता ओमप्रकाश यादव ने बताया कि 6 मार्च 2014 को महिला ने15 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने पुलिस को बताया कि वह तबियत खराब होने पर बेटी को अस्पताल ले गई।
यहां परीक्षण के बाद पता चला कि वह तीन माह की गर्भवती है। पूछताछ करने पर पता चला कि पड़ोस में रहने वाला नेपाल कई माह सेे उसे डरा धमकाकर दुष्कर्म कर रहा था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
अदालत ने केस की सुनवाई के दौरान सात गवाहों के बयान दर्ज किए और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद नेपाल को दोषी ठहराया। अधिवक्ता ने बताया कि पीड़िता का गर्भपात नहीं कराया गया था।
उसने नाबालिग अवस्था में ही बच्चे को जन्म दिया था। पीड़िता व उसके परिजन बच्चे का भरण पोषण कर रहे हैं।