फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एग्जाम में फेल होने पर छत से कूदकर जान दी

Fri, 12 Dec 2014 12:07 AM IST
अमर उजाला, इंदिरापुरम
विज्ञापन
विज्ञापन
सिविल सर्विसेज परीक्षा में फेल होने के बाद से डिप्रेशन में चल रहे युवक ने बृहस्पतिवार दोपहर को अहिंसा खंड स्थित ईस्ट एंड अपार्टमेंट की छत से कूदकर जान दे दी। 2012 में यूपीएससी की परीक्षा में असफल होने के बाद से युवक परेशान था।
विज्ञापन


परिजनों के समझाने पर इंदिरापुरम के फ्लैट में रहकर वह बैंक पीओ और अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों को सूचित कर दिया है। सुसाइड नोट में युवक ने मौत के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराया है।

हरियाणा के जींद निवासी जयदीप(28) इंदिरापुरम स्थित अहिंसा खंड के ईस्टर्न अर्पाटमेंट सोसायटी के एक फ्लैट में रहते थे। बृहस्पतिवार दोपहर अपार्टमेंट के गार्ड ने कुछ गिरने की आवाज सुनी तो वह बिल्डिंग के पास भागा।
विज्ञापन


वहां देखा तो जयदीप का खून से लथपथ शव पड़ा था। मृतक की जेब से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार खुद को बताया है।

जयदीप के मामा आनंद ने बताया कि वह करीब पांच माह से इंदिरापुरम में रह रहा था। पिछले कई सालों से यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। 2012 में यूपीएससी में असफल रहने के बाद से वह डिप्रेशन में था। उसका इलाज चल रहा था।

मगर घरवालों के समझाने के बाद वह बैंक पीओ और अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। एसओ हरिदयाल यादव ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। शुरुआती जांच में लग रहा है कि जयदीप ने अपार्टमेंट की छत से कूदकर खुदकुशी की है।

मृतक के भाई संदीप ने बताया कि जयदीप पिछले छह महीने से अस्वस्थ चल रहा था। उसको पेट संबंधी बीमारी हो गई थी, जिससे भी वह परेशान था।

पहले फंदा लगाने की कोशिश, बाद में छत से कूदा
एसओ हरिदयाल यादव ने बताया कि छत से कूदने से पहले जयदीप ने कमरे में पंखे से लटककर जान देने की कोशिश की थी। उसके कमरे के पंखे से बंधा एक कपड़ा मिला है। मगर किसी कारण से वह फंदा नहीं लगा सका। इसके बाद उसने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

बच्चे फेल तो हमेशा दें साथ
मनोचिकित्सक डॉ. अमिताभ साहा ने बताया कि बच्चे पढ़ाई में असफल भी हाें तो परिजनों को हमेशा उनका साथ देना चाहिए। इस दौरान उन्हें अकेला न छोड़ते हुए उनका मनोबल बढ़ाएं। तभी इस प्रकार की घटनाआें को रोका जा सकता है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें