हरिओम जाट ने बताया है कि उसका जन्म दिल्ली के फर्श बाजार इलाके में हुआ था। उसके पिता दिल्ली पुलिस में थे। उन्होंने समय से पूर्व रिटायरमेंट ले लिया था। इसके बाद वह परिवार के साथ अपना पब्लिशिंग का काम करने लगा।
1982 में पड़ोसी सतपाल उर्फ पप्पू जाट ने अपनी भतीजी के लिए हरिओम का रिश्ता मांगा। हरिओम ने इंकार कर दिया। तभी से दोनों के बीच दुश्मनी हो गई। 1993 में पप्पू जाट व उसके साथियों ने हरिओम के भाई सुरेंदर पाल की हत्या कर दी। 2003 में उसके दूसरे भाई नरेंदर पाल सिंह हत्या कर दी गई। हरिओम ने बदला लेने के लिए पप्पू की मां और जीजा समेत 16-17 हत्याएं कर डालीं।
शाहदरा में लगाना पड़ा था पुलिस बल
1993 में भाई सुरेंदरपाल सिंह की हत्या के बाद हरिओम जाट आग-बबूला हो गया। उसने 1997 में एक के बाद एक पप्पू जाट के परिवार के लोगों, दोस्तों व गैंग के सदस्यों की हत्या करनी शुरू की। इसकी वजह से शाहदरा इलाके में पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी।
1997 में अपराध शाखा ने हरिओम व उसके साथी हरीश चावला को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद हरिओम ने तिहाड़ में खुदकुशी का प्रयास भी किया। इसमें उसके खिलाफ हरी नगर थाने में मामला भी दर्ज हुआ।