फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शेयरिंग कैब नहीं है सुरक्षित, बढ़ रही हैं ऐसी वारदात

Mon, 18 Dec 2017 10:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
विज्ञापन
विज्ञापन
साइबर सिटी में शेयरिंग कैब व ऑटो में सफर करना सुरक्षित नहीं है। शेयरिंग ऑटो व कैब में होने वाली वारदात ने पुलिस की भी नींद उड़ानी शुरू कर दी है। शेयरिंग ऑटो व कैब की आड़ में कुछ गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं जोकि वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं और पुलिस के हत्थे कोई सुराग नहीं लग पाता।
विज्ञापन


वारदात के लिए प्रयोग की जाने वाली कैब पर नंबर भी फर्जी निकलता है। हालांकि गुरुग्राम पुलिस द्वारा शेयरिंग कैब व ऑटो प्रयोग करने को लेकर गाइडलाइन भी जारी की गई थी। इतना ही नहीं इनके नंबर सही हैं या नहीं इसे भी चेक करने के लिए एक ऐप बनाया गया थी, लेकिन इसे भी ठप कर दिया गया।

गुरुग्राम पुलिस के पास अब न तो शहर में चल रही ऑटो व कैब का कोई डाटा है और न ही चालकों की कोई जानकारी। ऐसे में कैब में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है।
विज्ञापन


शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में लोगों को शेयरिंग कैब, ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। शहर के राजीव चौक, एटलस चौक, इफ्को चौक, बस अड्डा, उद्योग विहार, सिकंदरपुर, एमजी रोड, कापसहेड़ा बॉर्डर, शंकर चौक सहित अन्य स्थान हैं, जहां से लोग इन कैब का सहारा लेकर अपना सफर तय करते हैं।

लूटपाट के लिए ऐसे व्यक्ति को ढूंढा जाता है जोकि उनके रूट पर जाने वाला अकेला ही हो। ऐसे में कैब व ऑटो में सवार अन्य साथी गाड़ी चलते ही उस पर टूट पड़ते हैं और वारदात को अंजाम देकर सवारी को बीच राह में ही छोड़कर फरार हो जाते हैं। ऐसे ही मामले लगातार पुलिस के सामने आ रहे हैं।
विज्ञापन

ठप पड़ा है गुरुग्राम पुलिस ऐप

ऑटो व कैब नंबर वैरिफिकेशन के लिए गुरुग्राम पुलिस ने करीब तीन साल पहले एक ऐप बनवाया था। इसमें गाड़ी का नंबर डालते ही पूरी डिटेल आ जाती थी। जो गाड़ी नंबर रजिस्टर्ड नहीं होता था उसकी रिपोर्ट पुलिस को पहुंच जाती थी, लेकिन यह ऐप अब ठप पड़ा है। 

थानों में सड़ रही हैं जब्त की गईं गाड़ियां
गुरुग्राम पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान अनेक ऐसी गाड़ियां पकड़ी गई हैं, जिनके कोई कागजात नहीं थे। इन गाड़ियों पर नंबर भी फर्जी होने की आशंका है। ऐसे में आज तक इन जब्त गाड़ियों को कोई छुड़वाने नहीं आया। जिले के प्रत्येक थाने में ऐसे वाहन वर्षों से खड़े सड़ रहे हैं।

मामला 1
बृहस्पतिवार शाम को एक कंपनी के एग्जीक्यूटिव ने बस अड्डे से शेयरिंग कैब दिल्ली जाने के लिए पकड़ी थी। दिल्ली जाने के लिए वह अकेला था, जिसने कैब पकड़ी थी। कैब में पहले से सवार युवकों ने रास्ते में उसे दबोच लिया और उसके साथ मारपीट कर उससे लूटपाट की और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी। शव को उन्होंने दिल्ली महिपालपुर के जंगलों में फेंक दिया। हालांकि युवक ने गाड़ी में बैठने से पहले गाड़ी नंबर नोट कर परिजनों को दिया था, लेकिन जांच में नंबर फर्जी निकला।

मामला 2
रविवार अल सुबह एक व्यक्ति ने पुलिस लाइन के बाहर से खांडसा मंडी जाने के लिए ऑटो पकड़ा। ऑटो में पहले से ही कुछ लोग बैठे हुए थे। जैसे ही ऑटो सिविल अस्पताल के पास पहुंचा तो ऑटो सवार युवकों ने उसे चाकू व देसी कट्टे की नोक पर ले लिया और उससे 1.71 लाख रुपये लूट लिए। विरोध करने पर उसकी पिटाई की और उसे झाड़सा रोड पर फेंक कर चले गए।

मामला 3
पिछले दिनों एक व्यक्ति अपनी वैगनआर गाड़ी को ओला कैब में अटैच करने के लिए लाया था। जब उसने कैब का नंबर व संबंधित दस्तावेज यहां जमा किए तो पता लगा कि उनके नंबर की गाड़ी पहले से ही ओला में अटैच है और उसे सवारियों की बुकिंग दी जा रही है। इस पर उसने उद्योग विहार थाना पुलिस को शिकायत देकर फर्जी नंबर पर गाड़ी चलाने का केस दर्ज कराया है।

'गाड़ियों की चेकिंग के दौरान आरसी देखकर जिन गाड़ियों पर शक होता है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जांच में यदि खामी पाई जाती है तो उन गाड़ी को जब्त कर लिया जाता है। गाड़ियों की चेकिंग आरटीए व पुलिस दोनों ही कर सकती है। यही कारण है कि आज भी विभिन्न थानों में अनेक वाहन बिना क्लेम के खड़े हैं।' - प्रदीप दहिया, एडीसी कम आरटीए सचिव
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें