चार बर्खास्त पुलिस कर्मियों में से एक हवलदार को पुलिस ने बृहस्पतिवार की सुबह उसके गांव हींगनपुर में दबिश देकर पकड़ लिया, लेकिन उसके परिजनों और समर्थकों ने हंगामा कर दिया। इस बीच हवलदार वहां से भाग निकला। डीएसपी का कहना है कि आरोपी को जल्द ही सलाखाें के पीछे भेजा जाएगा। आज के मामले में पुलिस ने समाचार लिखे जाने तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है।
दबिश में शामिल पिनगवां थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि पुलिस टीम बृहस्पतिवार सुबह हींगनपुर पुहंची और आरोपी बर्खास्त हवलदार महबूब को दबोच लिया। इसी समय आरोपी के परिजन और उसके समर्थकाें ने हंगामा कर दिया। इसी बीच महबूब पुलिस को चकमा देकर वहां से फरार हो गया। इसके बाद पुलिस टीम वहां से वापस आ गई।
पुन्हाना के डीएसपी सुभाष वशिष्ठ ने बताया कि करीब ढेड़ साल पहले सीआईए होडल में कार्यरत हवलदार महबूब सहित कई पुलिस कर्मियों ने राजस्थान के गांव बोनवाडी निवासी कुंदन लाल को नकली नोट और अफीम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसके बाद कुंदन लाल ने अपने आप को बेगुनाह बताते हुए चंदीगढ़ एवं पंजाब हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद इस मामले की जांच रेवाड़ी रेंज की आईजी ममता सिंह को सौंपी गई थी।
आईजी ममता सिंह ने अपनी जांच में पाया कि एएसआई महमूद की राजस्थान के गांव बोनवाडी में आस मोहम्मद नाम के आदमी से रिश्तेदारी है। राजस्थान में हुए पंचायत चुनाव में कुंदन लाल को आस मोहमद ने हरा दिया था और फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर कुंदन ने अदालत में मामला डाल रखा है।
जिसका फैसला कराने का दबाव बनाने के लिये एएसआई महमूद के इशारे पर सीआईए होडल में कार्यरत तत्कालीन पुलिस कर्मी महबूब, मुस्ताक और साजिद ने रंजिशन कुंदन लाल को फंसाया था। आईजी की जांच के बाद पलवल पुलिस कप्तान ने एएसआई महमूद, सिपाही महबूब, हवालदार मुस्ताक और सिपाही साजिद को बर्खास्त कर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार करने के आदेश दिये थे।
डीएसपी ने बताया कि कुंदन लाल की शिकायत पर बर्खास्त एएसआई महमूद, सिपाही महबूब निवासी हींगनपुर, हवलदार मुस्ताक निवासी शाहचौखा और सिपाही साजिद निवासी भादस के अलावा आस मोहम्मद, रफीक, इसाक निवासी बोनवाडी राजस्थान और आसु व रफीक निवासी थलचाना के खिलाफ 2 फरवरी 2016 को पुन्हाना थाने में मामला दर्ज किया गया था।
कुल 9 आरोपियों में से थलचाना निवासी रफीक को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी सभी आरोपी अदालत से भगोड़े घोषित हैं। बर्खास्त सिपाही महबूब की पत्नी वर्ष 2011 से 2016 तक गांव की सरपंच रह चुकी है। 2016 में उसकी पत्नी ने वार्ड नंबर 24 से जिला परिषद का चुनाव लड़ा लेकिन वह हाई गई थी।