महंगी गाड़ियों को अपना निशाना बनाने वाले आरोपी अजय डबास उर्फ जोगिंद्र सिंह को क्राइम यूनिट-9 ने गिरफ्तार किया है। वह यह अपराध अपनी गर्लफ्रेंड के साथ पब, बार में मौज मस्ती करने लिए करता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर चार दिन की रिमांड पर लिया है।
क्राइम यूनिट-9 सेक्टर-39 के प्रभारी उपनिरीक्षक राजकुमार की टीम ने बृहस्पतिवार शाम सात बजे बसई चौक से उसे गिरफ्तार किया। पुलिस को उसकी काफी समय से तलाश थी। आरोपी झज्जर जिले के गांव जहाजगढ़ माजरा का रहने वाला है।
12वीं पास अजय के खिलाफ 24 दिसंबर 2016 को थाना बादशाहपुर में धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। डीसीपी वेस्ट सुमित कुमार के मुताबिक, आरोपी महंगी गाङ़ी उनके मालिकों से किराए पर यह कहकर लेता था कि उसका होटल में ठेका है, वह कई गुना अधिक किराया देगा।
फिर वह फर्जी दस्तावेजों के साथ एग्रीमेंट कर लेता था
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- फोटो : अमर उजाला
फिर वह फर्जी दस्तावेजों के साथ एग्रीमेंट कर लेता था। इसके बाद उन्हें बिना बताए उनकी कार को ओएलएक्स पर डालकर बेच देता था। साथ ही अपने फोन नंबर भी बदल लेता था। इसी प्रकार वह मुंबई, नोएडा व दिल्ली में तीन गाड़ियों को बेच चुका है।
आरोपी ने बताया कि उसने मुंबई से ली एक्सयूवी गाड़ी को केरल, नोएडा से ली स्कार्पियो को नोएडा में ही बेचा। इसके अलावा मयूर विहार दिल्ली से ली क्रूज गाड़ी राजौरी गार्डन में स्थित एक क्लब के बाउंसर को बेची थी।
पूछताछ के दौरान उसके कब्जे से एक ऑडी व एक फॉर्च्यूनर कार को बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार ऑडी कार उसने एक स्थानीय गैंगस्टर के भतीजे को बेच दी थी।
किराये के तौर पर देता था फर्जी चेक
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- फोटो : अमर उजाला
आरोपी के खिलाफ 31 दिसंबर 2012 को थाना सेक्टर-40 में शेयर मार्केट में हेरी-फेरी करने का मामला दर्ज है। इस मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। जमानत मिलने के बाद से आरोपी भगोड़ा चल रहा था।
अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था। पुलिस की मानें तो कारों को बेचने के बाद मिलने वाले पैसे से वह मौज मस्ती करता था। गर्लफ्रेंड के साथ पब व बार में जाता था। पैसे खत्म हो जाते तो फिर नए शिकार की तलाश में निकल पड़ता था।
आरोपी अजय डबास गाड़ी मालिकों से संपर्क कर उनकी गाड़ी मोटे किराये पर लेने की बात कहता। उन्हें होटल में गाड़ी चलाने का ठेका होने की बात बताता। गाड़ी किराये पर लेते समय फर्जी बैंक खाते का चेक उन्हें अग्रिम थमा देता था।
इसके बाद गाड़ी लेकर फरार हो जाता था। फिर लोगों से संपर्क कर या फिर ओएलएक्स पर गाड़ी बेचने के लिए डाल देता था। आरोपी को इंटरनेट व कंप्यूटर की भी अच्छी समझ है। वह खुद अपना आधार कार्ड अलग पते पर जनरेट कर लेता था। नकली आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस बनाना उसके दाएं हाथ का काम था।