जब्त कार को छोड़ने की एवज में दस हजार रुपये की घूस लेने के दोषी हवलदार को कोर्ट ने तीन साल कैद की सजा सुनाई है। कार चालक से झगड़े के बाद पुलिस ने कार को जब्त कर कंझावला थाने में रखवा दिया था।
तीस हजारी अदालत के विशेष सीबीआई जज बृजेश गर्ग ने हवलदार देव राज को दस हजार रुपये की घूस लेने के आरोप में भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत तीन साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने देवराज पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि दोषी पर कानून की व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी थी लेकिन उसने अपने कृत्य से पुलिस के प्रति लोगों के विश्वास को चोट पहुंचाई है और पुलिस विभाग को बदनाम किया है।
अदालत ने देवराज को जब्त कार छोड़ने के लिये पीड़ित नरेंद्र सिंह से 2013 में दस हजार रुपये की घूस लेने का दोषी ठहराया था। अदालत ने इलैक्ट्रोनिक साक्ष्यों, पीड़ित व सीबीआई अधिकारी की गवाही के मद्देनजर देवराज को दोषी ठहराया है। सीबीआई ने देवराज को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
अभियोजन के मुताबिक पुलिस ने नरेंद्र सिंह की कार को 20 अगस्त 2013 को जब्त कर लिया था। उस समय नरेंद्र का दोस्त कार चला रहा था। पुलिस व नरेंद्र के दोस्त के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद कार को जब्त कर कंझावला थाने में जमा करवा दिया था। पेश मामले में नरेंद्र सिंह ने दो सितंबर 2013 को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि जब वह हवलदार देवराज से थाने में मिलने गया तो कार छोड़ने की एवज में उससे पैसा मांगा गया।
पीड़ित ने इसके बाद सीबीआई अधिकारियों से संपर्क किया और देवराज को घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मी ने सभी आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। जबकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी व पीड़ित के बीच बातचीत की रिकार्डिंग ने अभियोजन के आरोपों की पुष्टि की है। इस मामले में आरोपी को झूठा फंसाये जाने की कोई आशंका नहीं है।