ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके में दो दिन पहले बीजेपी के स्थानीय नेता की हत्या के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यवाही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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इलाके में रंगदारी मांगने का जो नेटवर्क फैला है उसके विरोध में आवाज उठाने वाले को मौत का ही मुंह देखना पड़ा है।
यहां पुलिस की लापरवाही ने अब तक कई लोगों की जान ले ली है। बीजेपी नेता विजय पड़ित हों या फिर व्यापारी मनमोहन की हत्या का मामला हो। हर बार पुलिस ने लोगों की शिकायतों को अनसुना किया। पढ़िए वो पांच मामले जिनमें दिखी पुलिस की लापरवाही:
पहली घटना: विजय पंडित की मौत
बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष व दादरी नगर पालिका की चेयरपर्सन गीता के पति विजय पंडित की बाइक सवार अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि विजय को लगातार फोन पर धमकियां मिल रही थीं, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया।
विजय पंडित ने 8 अप्रैल को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए दादरी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई और नतीजा यह रहा कि विजय की हत्या कर दी गई।
दूसरा मामला: आरटीआई एक्टिविस्ट की मौत
ग्रेटर नोएडा में रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रमोहन शर्मा को भी रंगदारी के खिलाफ पैरवी करने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी।
1 मई को एक्टिविस्ट चंद्रमोहन शर्मा की कार में जलकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में पुलिस की कार्यवाही भी सवालों के घेरे में दिखी।
चंद्रमोहन के परिजनों ने आरोप लगाया था कि 28 अप्रैल को उन्हें परी चौक पर एक जमीन के मामले में धमकी दी गई थी। एक्टिविस्ट की पत्नी सविता शर्मा ने हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था।
तीसरा मामला: व्यापारी मनमोहन की हत्या
ग्रेटर नोएडा के दनकौर में ही 9 अप्रैल को कपड़ा व्यापारी मनमोहन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें एकदम करीब से गोली मारी गई थी।
मनमोहन ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उसे अनिल दुजाना की ओर से लगातार धमकी मिल रही है और रंगदारी न देने पर जान से मारने की बात कही जा रही है।
इस मामले में भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और मनमोहन की हत्या कर दी गई। मनमोहन ने भी दनकौर में रंगदारी के खिलाफ आवाज उठाई थी।
चौथा मामला: ट्रांसपोर्टर का मर्डर
अप्रैल से अब तक पुलिस की लापरवाही से चार लोगों की जान जा चुकी हैं, लेकिन पुलिस हर बार खामोश ही रही।
अप्रैल में बदमाशों ने ग्रेनो के नरौली गांव में एक सीमेंट कंपनी के पास ट्रांसपोर्टर की हत्याकर दी थी। इसमें हत्या की वजह रंगदारी न देना ही पाया गया।
ट्रांसपोर्टर के परिजनों ने बताया कि उन्हें लगातार फोन करके रंगदारी मांगी जा रही थी और जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। दस मामले में भी पुलिस ने शिकायत नहीं सुनी।
पांचवां मामला: व्यापारी की हत्या
साल 2008 के सितंबर महीने में भी ग्रेनो में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी। दादरी में व्यापारी नेता विनोद गोयल की हत्या रंगदारी न देने के चलते ही कर दी गई थी।
उस दौरान करीब 100 से ज्यादा व्यापारियों से एक साथ रंगदारी मांगी गई थी। इस बात का विरोध विनोद गोयल ने किया तो पहले उन्हें धमकी दी गई और फिर मौत के घाट उतार दिया गया।
विनोद गोयल ने खुद तो रंगदारी देने से मना किया ही साथ ही इसके खिलाफ आवाज भी उठाई थी।
बीजेपी नेता विजय पंडित की हत्या के बाद दादरी पहुंचे उत्तर प्रदेश के एडीजी देवेंद्र चौहान ने माना कि ग्रेटर नोएडा एरिया में कई दशकों से रंगदारी के मामले सामने आते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को सख्ती बरतनी चाहिए। एडीजी चौहान ने कहा कि रंगदारी मांगने वालों के खिलाफ अब कड़ा एक्शन लिया जाएगा।