जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कंपनी के चेक के जरिये रकम ट्रांसफर की गई है। तकनीकी जांच के जरिये पुलिस ने कंपनी के एक कर्मचारी पटेल नगर निवासी आशीष को गिरफ्तार कर लिया। आशीष ने बताया कि चेक चोरी करने के बाद उसने उसे अपने सहयोगी पटेल नगर निवासी दीपक को सौंप दिया।
उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार किया। दीपक ने बताया कि वह चेक उसने साहिबगंज झारखंड के रहने वाले ऋषिकेश को दे दिया। पुलिस ने लालगंज बिहार से ऋषिकेश को गिरफ्तार कर लिया। ऋषिकेश ने पुलिस को बताया कि चेक उसने कोलकाता निवासी प्रबल सेन गुप्ता को दिया।
जिस पर पुलिस ने प्रबल को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। प्रबल ने बताया कि उसने टीटागढ़ निवासी सतेंद्र शर्मा को चेक सौंप दिया था। सतेंद्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने प्रबल के मार्फ त चेक लेने के लिए उसे बुलाया। लेकिन सतेंद्र ने राजकुमार को भेजा।
जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसके जरिये सतेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया। सतेंद्र ने बताया कि चेक उसने कोलकाता निवासी विप्लव दास को सौंप दिया। पुलिस ने कोलकाता से विप्लव को गिरफ्तार कर लिया।
कोलकाता में बैठकर गैंग का सरगना करता था फर्जीवाड़ा
जांच में पता चला कि कोलकाता में बैठकर विप्लव ही चेक पर पीड़ितों का फर्जी हस्ताक्षर करता था और फिर उसके जरिए वह दूसरे अकाउंट में रुपये ट्रांसफर करवा लेता था। जांच में पता चला कि सतेंद्र, प्रबल और विप्लव पर कोलकाता में फर्जीवाड़े के कई मामले दर्ज हैं।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग बैंक अधिकारियों, टेलीकॉम ऑपरेटर और अन्य सरकारी कर्मचारी की मदद से फर्जीवाड़े की वारदात को अंजाम दे रहा है। पुलिस ने बताया कि रुपये को ट्रांसफर करने के दौरान आरोपी टेलिकॉम ऑपरेटर की मदद से पीड़ितों का मोबाइल फोन ब्लॉक करवा देते थे ताकि उन तक रुपये निकाले जाने का मैसेज नहीं पहुंच पाए।