बैंकों के सामने व्यापारियों व लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस के तमाम दावे फेल हो गये। यहां पर पुलिस सुस्त और जेब कतरे चुस्त हैं। पिछले कई दिनों से लोगों की जेब तराशने वाले जेबकतरे को पुलिस ने नहीं पकड़ा है। जिससे जेबकतरों की बल्ले हो रही है।
बृहस्पतिवार को शहर के डाक्टर की जेब में से जेबकतरों ने 50 हजार रुपये दिन दहाड़े उड़ा दिये। बता दें कि नोटबंदी के बाद से शहर के भारतीय स्टेट बैंक व सिंडिकेट बैंक के सामने लाइन में लगे लोगों को जेबकतरे अपना निशाना बना चुके हैं। इन जेबकतरों पर न तो बुर्जुग महिलाओं पर तरस आ रहा है न ही किसी गरीब आदमी का।
सिंडिकेट बैंक में से पैंशन की राशि निकालकर बाहर आ रहे प्यारेलाल की जेब में से जेबक तरों ने तीन हजार रुपये व अन्य दस्तावेजों को बैंक के आगे भीड़ में से लूट लिया। कुछ दिन पूर्व एक 65 वर्ष की बुर्जुग महिला अपने 500 के नोट जो कि आठ हजार कुल रुपये थे उनको जमा करवाने भारतीय स्टेट बैंक में आई थी।
इसके भी नोट जेबकतरों ने लूट लिए। यह बुर्जुग महिला रोते हुए अपने घर गई। वीरवार को प्रात: 11 बजे भारतीय स्टेट बैंक के सामने 50 हजार रुपये जमा करवाने के लिए लाइन में लगे शहर एवं क्षेत्र के प्राख्यात डा. चंद्रप्रकाश वधवा को भी जेबकतरों ने अपना निशाना बना लिया।
बैंकों के इर्द-गिर्द घूम रहा जेबकतरों का गैंग
- फोटो : ANI
एक ने उनकी जेब में हाथ डाला, दूसरे ने धक्का दिया और वहां से वे फरार हो गए। डाक्टर वधवा ने कहा कि जेबतराशों का गिरोह बैंकों के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। मौका देखकर लोगों को अपना निशाना बनाता है।
कहने को पुलिस अधिकारियों ने बैकों के सामने सुरक्षा के नाम पर कुछ पुलिसकर्मी और होमगार्ड काफी संख्या में तैनात कर रखे हैं। लेकिन ये होमगार्ड़ एक तरफ खड़े होकर गप्पे हांकते हैं जो लोग लाइन में लगे होते हैं उनकी सुरक्षा से इनको कोई सरोकार नहीं होता है। शहर के लोगों ने कहा कि यदि पुलिस ने बैंकों के सामने सुरक्षा नहीं बढ़ाई तो जेब तराशने की और भी घटनाएं हो सकती हैं।
वीरवार को अधिकांश पुलिस के जवान अरावली में बने अवैध रास्तों को काटने के लिए बसईमेव गांव चले गए थे। बैंकों के सामने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ-साथ जेब तराशों को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जाएगा। -यादराम बिश्नोई, डीएसपी, फिरोजुपर झिरका।