जुर्म को पनाह देने वाली रात अक्सर गुनहगार को ऐसे अंधेरों में छिपा लेती है कि उस तक पहुंचते-पहुंचते हर रोशनी धुंधली पड़ने लगती है। ऐसा ही कुछ हो रहा है दिलावर सिंह हत्याकांड में।
दस महीने बाद भी चिपचॉप ढाबे के मैनेजर दिलावर की हत्या एक राज ही है। पुलिस के सामने न कोई सुराग है और न ही कोई आरोपी।
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इंदिरापुरम (गाजियाबाद) के रहने वाले 55 वर्षीय दिलावर का कत्ल रंजिश के चलते हुआ या फिर लूट के लिए उसकी जान ली गई.. इन सवालों के जवाब अभी तक पुलिस के पास नहीं हैं। दिलावर का शव उनकी कार की ड्राइविंग सीट पर पुलिस को मिला था।
सेक्टर-24 पुलिस को 11 जुलाई 2013 को मिले दिलावर के शव की कनपटी पर चोट का निशान था, वहां से खून रिस रहा था, लेकिन लूट की आशंका तब धुंधली हो गई जब तलाशी में पैंट की जेब से 27 हजार रुपये और मोबाइल मिले। कार की भी पूरी पड़ताल की गई, लेकिन कोई हथियार वहां नहीं मिला। पुलिस इस अंधे कत्ल में किसी चमत्कार की उम्मीद कर रही है। हालांकि ये उम्मीद भी बेवजह नहीं है।
कौन थे धमकी देने वाले?
दिलावर हत्याकांड की जांच में पुलिस ने हर उस शख्स तक पहुंचने की कोशिश की, जिसका संबंध इस कत्ल से हो सकता था। पुलिस ने परिजनों, ढाबा मालिक और वेटरों से भी पूछताछ की। इस पूछताछ में एक विवाद का पता चला। वारदात से दो दिन पहले दिलावर का बिल को लेकर दो लोगों से विवाद हुआ था। जिसके बाद उन्होंने मैनेजर को जान से मारने की धमकी दी थी। इस सुराग के बाद पुलिस ने विवाद करने वालों को बहुत ढूंढा, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। रोडरेज के पहलू से भी जांच की गई, लेकिन यहां भी पुलिस को कुछ हासिल नहीं हुआ।