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ऑनर किलिंग करने वाले मां-बाप ने किया गुनाह कबूल

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डीयू की छात्रा के ऑनर किलिंग मामले में लड़की के माता-पिता के अपना गुनाह कबूल करने के बाद केस के कई परत खुलकर सामने आए हैं। पुलिस से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक भावना की मौत के कुछ घंटों पहले ही उसकी अपने माता-पिता से बहस हुई थी।
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भावना 15 नवंबर को अपने माता-पिता के साथ अपने ससुराल से मायके आई थी जो द्वारका में ही है। गौरतलब है कि भावना का ससुराल भी द्वारका में ही है। भावना की शादी के बाद उसके परिवार के लोग इस शादी से काफी नाराज थे।

इसी सिलसिले में शनिवार को भावना के ससुराल में दोनों पक्षों की एक बैठक थी ताकि किसी नतीजे तक पहुंचा जा सके। उस बैठक में भावना के माता-पिता ने उससे वादा किया कि वो भावना की शादी पूरे रीति-रिवाज से करके उसकी विदाई करेंगे।
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मां-बाप ने तय कर दी थी किसी और से शादी

हालांकि शनिवार देर शाम ही भावना को यह एहसास हुआ कि उसके साथ छल किया गया है। उसे पता चला कि उसके मां-बाप ने उसकी शादी उसी की जाति में अलवर के किसी लड़के से 22 नवंबर के दिन की तय कर रखी है।

बताया जाता है कि दूसरी शादी के बारे में जानकर भावना की अपने माता-पिता से जोरदार बहस हो गई थी। उसका कहना था कि वह कानूनी तौर पर शादीशुदा है और अब उसकी दोबारा शादी नहीं हो सकती।

भावना के माता-पिता सावित्रि और जगमोहन ने बताया है कि भावना ने उन्हें कोर्ट तक घसीटने की धमकी दी। भावना की इसी धमकी पर उसके मां-बाप को गुस्सा आ गया। सूत्र बताते हैं कि वह भावना की मां थी जिसने गुस्से में आकर बेटी को पीटना शुरू किया।

उनका कहना था कि आज वो इस मुद्दे को खत्म करके ही रहेंगे। इसके बाद उसके पिता ने उसे पैरों से कसकर पकड़ लिया और मां ने भावना का गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

पिता ने पकड़ा पैर और मां ने दबा दिया गला

सूत्रों के अनुसार भावना के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि बेटी की मौत के बाद दोनों ने लोगों को सुनाने के लिए एक कहानी बना ली। उन्होंने अलवर में अपने रिश्तेदारों को फोन किया और बताया कि भावना को एक सांप ने काट लिया है और उसके इलाज के लिए वह उसे गांव लेकर आ रहे हैं।

इसी सिलसिले में पुलिस अधिकारियों की एक टीम अलवर पहुंची जहां उसका दाह संस्कार किया गया था। उसी टीम के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भावना की मौत का कारण अभी तक साफ नहीं हुआ है। पुलिस का मानना है कि गला घोटना उसका एक कारण हो सकता है।

भावना के पति को मिल रही है जान से मारने की धमकी

इसी दौरान भावना के पति अभिषेक सेठ ने बताया कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। अभिषेक की मां भारती सेठ का कहना है कि हमें गुड़गांव और अलवर से धमकी भरे फोनकॉल्स मिल रहे हैं।

धमकी देने वाले केस वापस लेने के लिए कह रहे हैं वरना अंजाम के लिए तैयार रहने की भी बात कर रहे हैं। अभिषेक की मां कहती हैं कि वह अपनी बहू के लिए न्याय चाहती हैं। और उनका बेटा केस वापस नहीं लेगा चाहे कुछ भी हो जाए।

साउथ-वेस्टर्न रेंज के ज्वाइंट कमिश्नर तजेंदर लुथरा ने बताया कि पुलिस को भावना के उस चाचा की भी तलाश है, जिसने अभिषेक को बुलाकर उसे गोली मार देने की धमकी दी थी। भावना के इस चाचा ने अभिषेक को तब धमकी दी थी जब भावना अपने मायके वापस आ गई थी।
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मां-बाप ने बुनी बेटी के मौत की झूठी कहानी

भावना के एक चाचा समय सिंह ने बताया कि बरोडा कान गांव के लगभग 20 से ज्यादा लोग जब भावना के अंतिम संस्कार के लिए इकट्ठे हुए थे। उस वक्त उन्हें भावना की मौत के पीछे का राज नहीं पता था। वह सभी समझ रहे थे कि वह सांप काटने से मरी है।

लेकिन जब भावना के अंतिम संस्कार में विधि-विधान का कोई खयाल नहीं रखा गया और बहुत ही जल्दबाजी में उसका दाह संस्कार कर दिया गया तो उन्हें कुछ शक हुआ। गांववालों को इस बात का सोमवार तक पता नहीं चला कि उसकी मौत में उसके मां-बाप का ही हाथ है।

हालांकि उन्हें कुछ गड़बड़ का शक तो तब से ही था जब अंतिम संस्कार के वक्त कोई पंडित मौजूद नहीं था और ना ही कोई रस्में निभाई गईं। भावना के परिवार वालों ने गोबर के उपलों से ही भावना की चिता बनाई। उसकी चिता भी घर से कुछ दूर पर ही बनाई गई थी, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दिन में करीब दस बजे भावना के माता-पिता उसके अंतिम संस्कार के लिए जोर डालने लगे। गांववालों को भी ये स्थिति बहुत ही अजीब लगी। इसके बाद उन्होंने आनन-फानन में गोबर के उपले और लकड़ियों का इंतजाम करके चिता बना दी। फिर उन्होंने किसी के आने का इंतजार नहीं किया और उसकी चिता को आग लगा दी।

भावना के माता-पिता उसी रात बिना किसी को बताए गांव से निकल गए। समय सिंह कहते हैं कि उन्हें दिल्ली से एक फोन आया और जल्दी जाना है यह कहकर उसी वक्त वहां से चले गए। सिंह ने उनसे कहा भी कि अब कुछ समय के लिए उन्हें कोई काम नहीं करना चाहिए क्योंकि उनकी बेटी हाल में ही गुजरी है पर वो इतनी जल्दी में थे कि उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी और गांव से निकल गए।
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