हादसे के बाद लापता चल रहे तांत्रिक सलीम का शव भी पुलिस को मिल गया है। शनिवार शाम सलीम का शव रामघाट क्षेत्र के गांव गोकुल के पास नहर से बरामद हुआ है।
अब तक सलीम पर साजिश और हत्या का जताया जा रहा शक भी उसका शव मिलने के बाद खत्म हो गया है। पुलिस ने अन्य लापता लोगों की तलाश तेज कर दी है। अब सबकी नजर प्रीति पर टिक गई हैं।
शुक्रवार सुबह हुए हादसे के बाद से तांत्रिक सलीम, ड्राइवर ओमपाल और राजे की बेटी प्रीति गायब थे। घटना का शक कहीं न कहीं तांत्रिक सलीम पर जताया जा रहा था।
मृतक राजे के परिजन अजीत सिंह की तहरीर पर ग्रेटर नोएडा में भी तांत्रिक सलीम के खिलाफ साजिश और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन अब सलीम का शव मिलने के बाद यह शक भी खत्म हो गया है।
शनिवार शाम 6 बजे पुलिस को तांत्रिक सलीम का शव रामघाट थाना क्षेत्र के गांव गोकुल के पास से गंगा किनारे मिला है। सलीम के शव की शिनाख्त के लिए उसके बेटे मुर्सलीम को बुलाया गया, जिसने शव को पहचान कर उसकी पुष्टि कर दी।
सलीम का शव मिलने से अब उसके ऊपर जताया जा रहा शक पूरी तरह खत्म हो गया है। सलीम का शव मिलने से पूरी कहानी में नया झोल आ गया है। रामघाट थाना एसओ एचएन सिंह ने भी सलीम के शव मिलने की पुष्टि कर दी है।
नरौरा नहर में कार से तीन शव मिलने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
नरौरा की एलजीसी नहर से कार में मिले तीन लोगों के शव मिलने का मामला और उलझता जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीनों की मौत का मुख्य कारण पानी में डूबने के कारण दम घुटना आया है।
तीन लोग डूबने पहले ही बेहोश थे, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार बेहोश के कारण शरीर के अंदर पानी जल्दी और आसानी से घुस गया। पीएम रिपोर्ट किसी साजिश की ओर इशारा कर रही है। तीनों शवों की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र निवासी ललित कुमार ने बताया कि वह, उसके पिता राजे, मां धर्मवती, बहन प्रीति, पत्नी शीतल, मामा राजेंद्र, मामी प्रीति, तांत्रिक सलीम और ड्राइवर ओमपाल किराये की कार से बदायूं स्थित बड़े सरकार की दरगाह पर मन्नत मांगने आए थे।
शुक्रवार शाम दरगाह में पूजा कर वह पास स्थित एक ढाबे पर आराम करने लगे। यहां बहन प्रीति और मां धर्मवती कोल्ड्र डिंक लेकर आईं और सभी को पिला दी। इसके बाद सभी बेसुध होकर सो गए।
शुक्रवार सुबह कार नरौरा की नहर में कार से राजे, धर्मवती और राजे की सलहज प्रीति के शव मिले थे। तीनों शवों का नरौरा से सुबह करीब 11 बजे पोस्टमार्टम के जिला अस्पताल बुलंदशहर भेगे गए।
एक बड़े स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट में पता चला है कि तीनों की मौत पानी में डूबने के कारण हुई है। रिपोर्ट में उल्लखित बिंदु से पता चलता है कि डूबने के समय तीनों बेहोशी की हालत में थे।
इसका कारण कि पानी तीनों के शरीर में आसानी से और जल्दी घुस गया। शरीर में कहीं भी चोट आदि के निशान भी देखने को नहीं मिले हैं। यदि तीनों बेहोशी की हालत में न होते तो डूबने से बचने के लिए हाथ-पैर जरूर फेंकते और कहीं न कहीं कोई निशान जरूर होता, लेकिन तीनों के शरीर पर कोई निशान देखने को नहीं मिला है।
10 घंटे की देरी से हुआ पोस्टमार्टम
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पुलिस की कागजी कार्यवाई पूरा न होने से पोस्टमार्टम करीब 10 घंटे से भी ज्यादा समय बाद किया जा सका। पुलिस को तीनों का पंचनामा और अन्य कागजी कार्यवाही पूरा करने में समय लगने के कारण ही पोस्टमार्टम में इतना समय लग गया।
जिला अस्पताल में अपराह्न करीब 11 बजे तीनों का शव पहुंच गया, लेकिन पोस्टमार्टम रात में करीब 9.30 बजे शुरू किया जा सका। स्वास्थ्य अफसरों ने देरी का कारण सीधे-सीधे पुलिस की लापरवाही को बताया।
मृतक परिवार के मुखिया राजे के बेटे ने यह तो बताया था कि सभी को कोल्ड्र डिंक में नशीला पर्दाथ मिलाकर पिलाया गया, लेकिन मृतकों के बिसरा रिजर्व रखने के लिए कोई प्रार्थना पत्र या मांग की गई।
बता दें कि किसी व्यक्ति को यदि नशीला पदार्थ दिया जाता है और उसकी मौत हो जाती है तो इसका खुलासा बिसरा से ही किया जा सकता है। इसके लिए परिजन या पुलिस बिसरा रिजर्व करने के लिए कहती हैं। लेकिन इस मामले में मृतकों में से किसी का भी बिसरा रिजर्व नहीं किया गया, जो अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना एक, तहरीर तीन और रिपोर्ट दो
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हादसा या सोची-समझी साजिश। घटना एक है, लेकिन तहरीरें तीन अलग-अलग तरीके से तीनों जिलों में दी गई हैं। जबकि रिपोर्ट बुलंदशहर और नोएडा में दर्ज हुई हुई। ऐसे में पूरी कहानी उलझ लग गई है।
यही कारण है कि तीनों जनपदों की पुलिस गेंद को एक-दूसरे के पाले में डाल रही है। शनिवार को इस कहानी में भूतप्रेत ने भी एंट्री कर दी है। अजीबोगरीब कहानी में उलझी पुलिस अब पूरी स्टोरी के लापता किरदार प्रीति और ड्राइवर ओमपाल की तलाश में जुटी है।
वहीं सलीम का शव बुलंदशहर के ही रामघाट थाना क्षेत्र के नहर से शनिवार शाम मिल गया है। मृतक परिवार के परिजन अजीत सिंह पुत्र जगत सिंह की ओर से कासना में दर्ज रिपोर्ट में बताया गया है कि तांत्रिक सलीम घर में भूतप्रेत की बात कहकर पूरे परिवार को बदायूं स्थित दरगाह ले गया था।
तांत्रिक पर ही परिवार को नशीला पदार्थ मिलाकर षडयंत्र का आरोप लगाते हुए हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जबकि बदायूं में ललित द्वारा दी गई तहरीर में कहा गया है कि दरगाह में जियारत के बाद हम सभी को कोल्ड्र डिंक में नशीला पदार्थ पिला दिया गया।
होश में आने पर पता चला कि हम तीन यहां हैं, तीन की लाश नहर में मिली है और तीन गायब हैं। ललित ने किसी बड़ी साजिश की बात भी कही है। अब तीसरी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है नरौरा थाने में।
यहां मृतक राजे के चचेरे भाई जगत सिंह की तरफ से सिफग् दुर्घटना होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। गौर करने वाली बात ये है कि राजे के जिस परिजन अजीत सिंह की तरफ से हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, उसी के पिता जगत सिंह की तरफ से दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
एक ही घटना की तीन अलग-अलग तहरीर और दो जगह अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज होने से मामला पूरी तरह उलझ गया है। पूरा मामला संशय के घेरे में है। पुलिस की नजर घटना के मुख्य किरदार मृतक राजे की बेटी प्रीति पर टिकी है।
प्रीती ही मामले से पर्दा उठा सकती है। क्योंकि बदायूं में लालपुल चौकी पुलिस ने रात में कार के पास सिर्फ प्रीति को ही पूरे होशोहवाश में देखा था। उसके बाद कोई अनजान युवक कार को लेकर गया था। अब पुलिस प्रीति के साथ ड्राइवर ओमपाल की तलाश में जुटी है।
कहानी के 10 वें किरदार की तलाश में पुलिस
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नोएडा से बदायूं और फिर नरौरा के बीच में घटी पूरी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण किरदार प्रीति और उस 10 वें व्यक्ति का है, जो उससे बदायूं में मिला।
पूरी कहानी में इतना झोल है कि पुलिस से लेकर परिजन तक अलग-अलग कहानी बता रहे हैं। पुलिस का दावा है कि प्रीति उस लड़के के साथ गई, जबकि उसके भाई ललित का कहना है कि वह कार से ही गई।
कहानी के 10वें किरदार की पूरी घटना में क्या भूमिका रही, यह तो अभी नहीं पता चला है लेकिन यह किरदार इस कहानी की महत्वपूर्ण कड़ी है। राजे का परिवार नोएडा से जियारत के लिए शुक्रवार सुबह बदायूं को चला। जियारत के बाद ढाबे पर कार रुकी।
प्रीति ने सभी को कोल्ड्र डिंक पिलाई, जिसके बाद सभी बेहोश हो गए। लेकिन प्रीति पूरी तरह होश में थी, क्योंकि वहां पहुंची पुलिस की चीता वन में सवार पुलिसकर्मियों से उसने बात की और परिजनों के थकान के बाद सोने की बात कही।
पुलिसकर्मियों के मुताबिक ही एक युवक आया, ड्राइविंग सीट पर बैठा और गाड़ी लेकर चला गया। पुलिसकर्मियों का यह भी दावा है कि प्रीति उस गाड़ी से नहीं गई, जबकि ललित के अनुसार प्रीति उसी गाड़ी से गई।
यदि ललित बेहोश था तो उसे प्रीति के किस गाड़ी में जाने का पता चला। यदि पुलिसकर्मियों के अनुसार, यह 10वां व्यक्ति गाड़ी चलाकर ले गया तो फिर यह उतरा कहां और प्रीति किस गाड़ी से कहां पहुंची।
बीच वाली सीट पर भी था कोई
ईको कार में तीन प्रकार की सीट होती हैं। सबसे आगे ड्राइवर सीट, इसके बाद फिर बीच में एक और सीट और सबसे पीछे एक और सीट। तीनों मृतकों के शव पीछे वाली सीट पर मिले हैं। मतलब साफ है कि बीच में और आगे भी कोई न कोई बैठा था। गोताखोरों ने भी यह बताया कि जब वह गाड़ी बाहर निकाल रहे थे निकाली जा रही थी तो कोई कार से पानी में गिरा। शनिवार को देर शाम आखिरकार सलीम का शव भी मिल गया।
लापता लोगों की तलाश में दौड़ते रहे परिजन
एसओ नरौरा एचएन सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम नहर की पटरी के किनारे बने मार्ग से रास्ते के ग्रामों में ग्रामीणों से जानकारी लेते हुए आगे बढ़ती गई।
संभावित स्थानों पर पुलिस नहर किनारे के झुंडों व झाड़ियों में तलाश करते हुए आगे बढ़ती रही। लेकिन पुलिस को इसमें कोई सफलता हाथ नही लगी। घटना में लापता लोगों के परिजन अपनों की खोज में पुलिस के सर्च के दौरान साथ रहे।
सर्च के दौरान रामघाट थाना क्षेत्र में ग्राम गोकुलपुर के निकट पुलिस को अज्ञात शव मिला, लेकिन पुलिस के साथ मौजूद लापता चालक ओमपाल के साले ने लक्ष्मन पुत्र दशरथ निवासी नया विजय नगर ने इस शव को देखा और उनके लापताओं में से किसी का नहीं होंने की बात बताई। एसआई सुरेश कुमार ने बताया कि इस अज्ञात शव का पंचनामा भरने की तैयारी की जा रही है।
कार में लगी हुई थी चाभी
कार निकालने वाले तैराकों ने बताया कि कार को नदी से निकाले जाने के दौरान कार के र्स्टाटिंग स्विच में चाभी लगी हुई थी। कार में एक दो लीटर की कोल्ड ड्रिंक की बोतल पड़ी थी।
पुलिस ने बताया कि कार में मृत मिले राजे 55 वर्ष, धरमवती 50 वर्ष निवासी नवादा, प्रीति पत्नी राजेंद्र निवासी चीरसी थाना कासना के पास कोई मोबाइल नहीं मिला। एसओ एनएच सिंह ने बताया कि कार में गाड़ी के कागजात नहीं मिले, लेकिन एक पालीथिन में चालक ओमपाल का ड्राइविंग लाइसेंस मिला था।
साजिश का इशारा कर रहे ये अनसुलझे सवाल
- बदायूं में ललित, शीतल और राजेंद्र क्यों उतरे या क्यों उतारे गए
- बंद पड़े ढाबे पर आखिर क्यों रोकी गई गाड़ी, इतनी दूर क्यों हुई घटना
- प्रीति से बात करने वाला युवक कौन था और फिर कहां चला गया
- जब सभी बेहोश हो गए तो बदायूं से नरौरा तक गाड़ी कौन लाया
- यदि ड्राइवर गाड़ी लाया तो उसने सभी के बेहोश होने पर विरोध क्यों नहीं किया
- जब ललित बेहोश हो गया तो उसे कैसे पता कि प्रीति किस गाड़ी से गई
- हादसे के वक्त गाड़ी कौन चला रहा था, 10वां व्यक्ति आखिर उतरा कहां पर
- तीनों मृतक पीछे वाली सीट पर थे तो बीच में और आगे वाली सीट पर कौन था