उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-29 में स्थित पंजाबी क्लब को रेस्त्रां में पार्टी कर शोर-शराबा करना मंहगा पड़ा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने क्लब पर ध्वनि प्रदूषण के लिए कुल 7 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। यह क्लब पंजाबी एसोसिएशन के जरिए चलाया जाता है।
पीठ ने कहा कि पंजाबी क्लब बीते दस वर्ष से बिना अनुमति संचालित हो रहा है इसके अलावा क्लब के जरिए ध्वनि प्रदूषण भी किया जा रहा है। ऐसे में क्लब को पास में ही मौजूद भारद्वाज अस्पताल को 5 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा देना होगा और भविष्य में ऐसा न करने के लिए अतिरिक्त 2 लाख रुपये उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के पास जमा करना होगा।
जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को राजीव राय के मामले का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। याची का आरोप था कि पंजाबी क्लब की वजह से भारद्वाज अस्पताल में मरीजों को और आस-पास रहने वाले लोगों को ध्वनि प्रदूषण के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में क्लब को सख्त आदेश दिया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि पंजाबी क्लब को सख्त तरीके से ध्वनि मानकों का ख्याल रखना होगा। खासतौर से नजदीक में मौजूद अस्पताल और अन्य निवासियों को ध्वनि प्रदूषण की वजह से समस्या नहीं होनी चाहिए।
वहीं पीठ ने कहा कि यूपीपीसीबी को कड़ी निगरानी रखनी होगी साथ ही समय-समय पर इसकी जांच भी करनी होगी कि क्लब के जरिए ध्वनि प्रदूषण न होने पाए। पीठ ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लाडडस्पीकर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। पीठ ने कहा कि शोर को नियंत्रित करने के लिए पंजाबी क्लब अपने लॉन में बड़े पेड़ों की दीवार भी बनाए।
पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि नोएडा के संबंधित प्राधिकरण कम से कम पांच स्थानों पर शांति क्षेत्र का बोर्ड लगाएं। वहीं लोगों की जागरूकता के लिए लिखें कि ध्वनि मानकों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूल जाएगा। पीठ ने कहा कि खासतौर से अस्पताल वाले इलाकों को ध्यान में रखा जाए।