अदालत ने तीन वर्ष पूर्व दनकौर क्षेत्र के गांव में नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म के मामले में दोषी अंकित को सात साल की सजा सुनाई। एडीजे प्रथम राम नरेश मौर्या ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माने भी लगाया।
वहीं दो अन्य आरोपियों के खिलाफ पीड़ित लड़की द्वारा गवाही न देने के कारण कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता ओमप्रकाश यादव ने बताया कि 9 मई 2013 को दनकौर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
उसने बताया था कि उसकी 16 वर्षीय बेटी रात तीन बजे नित्यकार्य के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान गांव निवासी अंकित ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर उसे अगवा कर लिया।
अगले दिन शाम को लड़की मिल गई थी। लड़की के बयान के आधार पर अंकित, शहजाद और मोहम्मद अली पर अपहरण कर दुष्कर्म का केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था।
अदालत में केस की सुनवाई के दौरान छह गवाहों ने बयान दर्ज कराए गए, लेकिन शहजाद और मोहम्मद अली के खिलाफ लड़की गवाही देने से मुकर गई। इसके चलते अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने अंकित को अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में अलग-अलग सात-सात साल कारावास की सजा सुनाई।